Hemant Soren: फेंकने की भी सीमा होती है,

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फेंकने की भी सीमा होती है, पर जुमलेबाज़ी के आविष्कारक को इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है।

साहब, झारखंड में 2011 census के अनुसार झारखण्ड में क़रीब 65 लाख परिवार हैं। अब नीचे दिए आँकड़ों पर गौर करें तो –

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– हर छठे परिवार को ठगुबर सरकार ने घर दिया

– हर साल 2 लाख घर बने

– हर महीने 17 हज़ार घर

– हर दिन क़रीब 600 घर राज्य में

मतलब कुछ भी फेंक दो जनता के समक्ष। और हम चुप चाप सुन ले

इस हिसाब से तो झारखण्ड में कोई सड़क किनारे नहीं सो रहा होता। हर गरीब के पास पक्का मकान होता।

घर बनाना तो दूर की बात, राँची, टाटा, धनबाद समेत हर शहर में हज़ारों आशियाने तोड़े हैं इस तानाशाह सरकार ने।

झूठ बोलने की हर सीमा पार कर चुकी है यह ठग सरकार #JharkhandMangeBadlav


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