अद्भुत: पृथ्वी से 10 गुना भारी हज़ारों ग्रह यहां पगलाए हुए से चक्कर काट रहे हैं, ये हैं वजहें

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ये बिल्कुल नया सिद्धांत है. अब तक ये मान्यता थी कि ग्रहों का निर्माण तारों के आस-पास मौजूद गर्द-गुबार से होता है.

अंतरिक्ष में असंख्य ग्रहों की भरमार है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इन ग्रहों की बनावट और चरित्र में काफी अंतर पाया है. जापान के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा किया गया एक ताज़ा शोध हैरान कर देने वाला है. शोध के मुताबिक़ एक विशालकाय ब्लैक होल के चारों तरफ़ हज़ारों की तादाद में ग्रह उसी तरह चक्कर काट रहे हैं जैसे पृथ्वी सूरज का चक्कर काटती है.


आम तौर पर अब तक ये माना जाता है कि ग्रहों का निर्माण तारों से बचे-खुचे गर्द-गुबार और गैसों से होता है. कम उम्र के तारों के इर्द-गिर्द ना सिर्फ़ गर्द-गुबार के बने छल्ले होते हैं, बल्कि ये विशालकाय ब्लैक होल्स के आस-पास ही पाए जाते हैं. 

अद्भुत: पृथ्वी से 10 गुना भारी हज़ारों ग्रह यहां पगलाए हुए से चक्कर काट रहे हैं, ये हैं वजहें

इन मज़बूत छल्लों के पदार्थों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि ब्लैक होल्स के इर्द-गिर्द मौजूद गर्द-गुबार से ना सिर्फ़ तारों का निर्माण होता है, बल्कि इससे ग्रह भी बनकर तैयार हो जाते हैं. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपी रिपोर्ट में कगोशिमा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा, “इससे अंतरिक्ष विज्ञान में अध्ययन के नए दरवाज़े खुलेंगे.” 


कुछ विशालकाय ब्लैक होल्स के चारों तरफ़ मौजूद छल्लों में भारी पदार्थों की मौजूदगी होती है. इनमें से एक डिस्क के भीतर सूरज के द्रव्यमान से एक लाख गुना ज़्यादा डस्ट की मौजूदगी हो सकती है. अगर एक यंग स्टार के छल्ले से इसकी तुलना करें तो ब्लैक होल के छल्ले का द्रव्यमान एक अरब गुना ज़्यादा होगा. 


मुख्य शोधकर्ता प्रोफ़ेसर किची वादा के मुताबिक़, “ब्लैक होल के आस-पास मौजूद गर्द का छल्ला इतना घना होता है कि मध्य क्षेत्र से निकलने वाले भीषण रेडिएशन यहां आकर दम तोड़ देते हैं साथ ही यहां कम तापमान का क्षेत्र बनकर तैयार हो जाता है.”

अद्भुत: पृथ्वी से 10 गुना भारी हज़ारों ग्रह यहां पगलाए हुए से चक्कर काट रहे हैं, ये हैं वजहें

शोधकर्ताओं ने यहां पर उसी सिद्धांत को लागू किया जिसे वो सामान्य तारों के डिस्क से ग्रह बनने की प्रक्रिया के दौरान लागू करते हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि कम तापमान वाले ज़ोन में करोड़ों वर्षों की प्रक्रिया के दौरान सीधे ब्लैक होल के छल्लों से ग्रह बनकर तैयार हो जाते हैं. 


नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी ऑफ़ जापान के प्रोफ़ेसर इचिरो कोकुबो कहते हैं, “हमारी गणना के मुताबिक़ इस ब्लैक होल के इर्द-गिर्द पृथ्वी के द्रव्यमान से 10 गुना बड़ा दसियो हज़ार ग्रह बनकर तैयार हुए हैं.” वे आगे बताते हैं कि ब्लैक होल्स के चारों तरफ़ ग्रह मंडलों की विशाल मौजूदगी हो सकती है.


शोधकर्ताओं ने ये भी कहा कि फ़िलहाल ये सारी बातें सिद्धांत की शक्ल में ही मौजूद हैं और उनके पास ब्लैक होल्स के आस-पास ग्रह मंडलों का पता लगाने का कोई रास्ता नहीं है और ना ही वे ये बता सकते हैं कि इन ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ. वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके अध्ययन में जारी अनुमान अब तक के सारे सिद्धांतों की कसौटी पर खरा उतरता है. 


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