गुजरात: गलत तरीके से नॉन‑ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिये गयये है। यह बात सच साबित हुयी है !

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तारीख २-०८-२०१९ को 92 रबरी लोगोके गलत तरीकेसे दिए गए आदिवासी जाती के प्रमाण पत्र तुरंत रद करनेका  आदेश गुजरात राज्य की हाई कोर्ट ने किया है । इस से ये तो पता चलता ही है की किये गए दावे सच है । Cast certificate

येतो जो मामले सामने आये है वो है । पर जो लोग ऐसे गलत तरीकेसे जातिके दाखले ले के नोकरी कर रहे है उनका क्या ? उनका आज तक कोय उपाय नहीं हुआ है ।

इन मामलों पर कई लोगोने आवाज उठाई है इन सभीकी जित हुयी है । यह एक सुरुवात है …

श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा (भरूच) : अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे आदिवासियों से संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न पर जीरो ऑवर में बोलने के लिए अनुमति दी, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूँ।

महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि देश के कई राज्यों में गलत तरीके से नॉन‑ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है। उन प्रमाण पत्रों के आधार पर कई नॉन‑ट्राइबल लोगों को एसटी कोटा में मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं उच्चतम अभ्यास क्रमों में एडमिशन मिल जाता है। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी भी सरलता से मिल जाती है। इससे आदिवासियों का अधिकार समाप्त हो रहा है और वे अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। गुजरात के सौराऐट्र में भी रबारी, भरवाड़ एवं सिद्धी मुसलमान को हजारों की संख्या में प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और उन प्रमाण पत्रों के आधार पर एसटी कोटा में हजारों लोगों को नौकरी मिल रही है।

महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि जिन लोगों को ट्राइबल कोटे में प्रमाण पत्र मिले हैं, उनके आधार पर जिनको नौकरी मिली है, गलत तरीके से बोग़स प्रमाण पत्र मिले हैं, उन्हें रद्द किया जाए और जिनको नौकरी मिली है, उनको ओपन कैटेगरी में लिया जाए। मैं आपके माध्यम से सरकार से इतना ही अनुरोध करना चाहता हूँ। धन्यवाद।

गलत तरीके से नॉन‑ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है।

श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा (भरूच) : अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे आदिवासियों से संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न पर जीरो ऑवर में बोलने के लिए अनुमति दी, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूँ। महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि देश के कई राज्यों में गलत तरीके से नॉन‑ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है। उन प्रमाण पत्रों के आधार पर कई नॉन‑ट्राइबल लोगों को एसटी कोटा में मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं उच्चतम अभ्यास क्रमों में एडमिशन मिल जाता है। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी भी सरलता से मिल जाती है। इससे आदिवासियों का अधिकार समाप्त हो रहा है और वे अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। गुजरात के सौराऐट्र में भी रबारी, भरवाड़ एवं सिद्धी मुसलमान को हजारों की संख्या में प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और उन प्रमाण पत्रों के आधार पर एसटी कोटा में हजारों लोगों को नौकरी मिल रही है। महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूँ कि जिन लोगों को ट्राइबल कोटे में प्रमाण पत्र मिले हैं, उनके आधार पर जिनको नौकरी मिली है, गलत तरीके से बोग़स प्रमाण पत्र मिले हैं, उन्हें रद्द किया जाए और जिनको नौकरी मिली है, उनको ओपन कैटेगरी में लिया जाए। मैं आपके माध्यम से सरकार से इतना ही अनुरोध करना चाहता हूँ। धन्यवाद।

Posted by Myadivasi on Saturday, 16 March 2019

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92 રબારીઓ કે જે ખોટા ST સર્ટિફિકેટ મેળવી MBBS માં એડમિશન લઈ ડોકટર બનવા ઘુસી ગયા હતાં એમના ST ના સર્ટી ગઈ કાલે ગુજરાત રાજ્યની હાઇકોર્ટે તાત્કાલિક અસરથી રદ કરવાનો હુકમ કરતાં આદિવાસી સંગઠનની મોટી જીત થઈ છે..

PIL 135 માં કોર્ટે આદિવાસી સંગઠનની તરફેણમાં ચુકાદો આપતા હવે સરકારની પોલિસી સામે સવાલો ઉભા થઈ રહ્યા કે કોની મિલીભગત ને કારણે આ ખોટા સર્ટી આપવામાં આવી રહ્યા છે..
એ પણ જોવાનું રહ્યું કે આ 92 લોકો સામે અને એમને ખોટા સર્ટી આપનાર અધિકારીઓ સામે ફોજદારી પગલાં લેવાય છે કે કેમ..

સમસ્ત આદિવાસી સમાજના તમામ આગેવાનો નો ખુબ ખુબ આભાર અને ધન્યવાદ સમાજ માટે લડવા બદલ..આભાર
જય આદિવાસી

एक और बात आपसे कहना चाहताहू हर बार आदिवासी को न्याय के लिए हाईकोर्ट – सुप्रीमकोर्ट जाना होगा ?

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