गुजरात में आदिवासियों पर पकड़ बनाने के लिए २०१९ में भाजपा, क्या केवड़ीया, भारतमाला ओर भरूच की खदानों के बारेमे सोचे गी?

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भरूच, छोटूभाई वसावा चुनाव में खड़े होने की बात सामने आ रही हे , कोंग्रेस ओर छोटुभाई वसावा यानि बिटिपि का संगठित हो कर भी चुनाव की बारी इसबार भरूच से खेली जा सकती हे । बीटिपि  का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले आदिवासी समाज पर भाजपा की पकड़ बनाए रखने के लिए गुजरात सरकार क्या केवाड़ी, भारतमाला ओर भरूच की खदानों के बारेमे सोचे गी?। प्रतिभाशाली आदिवासियों के सम्मान उनके लोक देवताओं की पूजा के साथ उनके जल जंगल व जमीन की मांग को भी बुलंद करेगी?।

उत्तर गुजरात के अंबाजी से लेकर दक्षिण गुजरात के उमरगाम तक 14 जिलों के साढ़े चार हजार गांवों में बसे करीब 90 लाख आदिवासी आमतौर कांग्रेस ओर बीटिपि का परंपरागत वोट बैंक रहे हैं। पूर्व सीएम दिवंगत अमर सिंह चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री नारणभाई राठवा, तुषार चौधरी, पूर्व सांसद प्रभा तावियाड, विधायक अश्विन कोटवाल आदि कांग्रेस के चर्चित आदिवासी नेता रहे हैं लेकिन अमर सिंह के निधन के बाद इस समुदाय पर कांग्रेस की पकड़ ढीली होती गई। हाला की अभी श्री अनंत पटेल जोरोसे दक्षिण गुजरात में समाज का काम कर रहे हे।

साथ ही श्री महेशभाई वसावा जो देदियापाडा MLA हे उनकी पार्टी बी.टी.पि भी गुजरात में मजबूत हुयी है ओर पुरे भारत के आदिवासी विस्तारोमे भी अपना प्रभुत्व बाढा रही है

पुराने वर्षो में भरूच के आदिवासियों ने खुलकर भाजपा के समर्थन में मतदान किया। भरूच के  आदिवासी बहुल सीटों पर सर्वाधिक मतदान होता रहा हे ओर भरूच की सिट पे संषद श्री मनसुख वसावा कई बर्सो से जीतते आ रहे हे । भाजपा की ओर से आदिवासी वोट बैंक को साधने का काम आदिवासी पूर्व मंत्री मनसुख वसावा कर रहे हैं। अभीके सालोमे भरूच जिल्ले के लोकसभा क्षेत्र  बहुत प्रोजेक्ट भाजपा की मोदी सर्कार द्वारा किये गए हे । ओर भाजपा सर्कार के लिएभी ये विस्तार महत्त्व पूर्ण है, तो क्या इसबार भाजपा इस सिट को दाव पर लगा सक्ती है?

संसद श्री मनसुखभाई वसावा भाजपा में नीस्था पूर्वक काम किया हे साथही साथ समाजके लिए सर्कार में भी आवाज उठाते रहे है । समाज के हित के लिए सदा कार्य रत रहे है ।

आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा जहां एक ओर अपने परंपरागत वोट बैंक पाटीदारों को साथ रखने की हरसंभव कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस का कभी वोट बैंक रहे आदिवासी समुदाय पर भी अपनी पकड को बरकरार रखने के प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते आदिवासियों के लिए 12 हजार करोड की वनबंधु योजना की शुरुआत की थी, जिसके चलते अंबाजी से उमरगाम तक बसे इस समुदाय के जीवन स्तर में आमूल चूल परिवर्तन दिखने लगा हे ऐसा कहा जाता है । पर ये बात कितनी सच है ये तो आदिवासी समाज ही बता सकता है ।

केवड़िया के प्रश्न, भारत माला प्रोजेक्ट, भरूच में आई खदाने, SC -ST के जातीय प्रमाण पत्र, 73AA जमीन के मामले ओर आदिवासी के संविधानिक अधिकार की लढत गुजरात के आदिवासी पट्टो में जोर से चल रही है । सामने इलेक्सन नजदीक है तो क्या इस वक्त में आदिवासी लोगो के बारेमें कोय निर्णय लिए जाये गे?

डॉ. भाविन वसावा भरूच


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