नागालैंड: 14 अगस्त को नागालैंड में अलग झंड़ा फहराने का सच क्या है

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जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया है. आर्टिकल 370 के कुछ प्रावधानों को खत्म करने के बाद राज्य के अलग झंडे का महत्व भी खत्म हो गया है. इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट वायरल हो रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि नागालैंड ने 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया. साथ ही अलग झंडा फहराया. लल्लनटॉप के कुछ पाठकों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं तस्वीरें भेजीं और जानना चाहा कि मामला क्या है. क्या वाकई में ऐसा है?

द हिन्दू  की खबर के मुताबिक नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने 14 अगस्त को म्यांमार सहित नागा-आबादी वाले क्षेत्रों में 73वां नागा स्वतंत्रता दिवस मनाया. और नागा राष्ट्रीय ध्वज फहराया. रिपोर्ट में कहा गया है कि नागा स्वतंत्रता दिवस एक वार्षिक आयोजन है. लेकिन इस साल जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के बाद राज्य के झंडे का महत्व नहीं रहा. जब नागालैंड ने अपना अलग झंडा फहराया तो लोगों का ध्यान इस ओर गया.

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एनएसएफ के प्रेसिडेंट का क्या कहना है? 

एनएसएफ के प्रेसिडेंट हैं निनोतो अवॉमी. उनका कहना है कि कोहिमा में नागा सॉलिडैरिटी पार्क और नागा आबादी वाले अन्य क्षेत्रों में एक साथ 14 अगस्त को सुबह 11 बजे नागा नैशनल फ्लैग फहराने के पीछे किसी भी तरह का राजनीतिक संदेश नहीं है. यह आयोजन हमारी पहचान है. आयोजन का मतलब ये नहीं है कि हम भारत के खिलाफ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नागालैंड के कमिश्नर हमारे पास आए और हमारे कार्यक्रम के बारे में पूछा. हमने उनसे कहा कि नागा पहचान के ऐसा कर रहे हैं और इसमें भारत के खिलाफ जैसा तो कुछ भी नहीं है.

उन्होंने आगे बताया कि 14 अगस्त को जो झंडा फहराया गया है वह कॉमन नागा फ्लैग है. इस फ्लैग में एक सफेद रंग का स्टार ऊपरी हिस्से में बना हुआ है और एक तिरछा रेनबो दिख रहा है. यह कुछ वैसा है ही जैसा कि नेशनल सोशल काउंसिल ऑफ नागालैंड के इसाक-मुइवा गुट द्वारा इस्तेमाल किया गया था, जो कि शांति समझौते के रूप में एक अलग झंडे की मांग कर रहा था.

नागा अपने प्रतीकों को लेकर हमेशा से सजग रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा प्रतीक है नागा झंडा. अगस्त 2015 में भारत सरकार और नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स (NNPG) (मुख्यतया नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड NSCN) लड़ाई छोड़कर समझौते के लिए राज़ी हो गए थे. लेकिन बात फंसी नागा प्रतीकों पर. और इनमें सबसे बड़ा प्रतीक है अलग नागा झंडा. नागा गुट राज्य के लिए अलग झंडा चाहते हैं.

नागालैंड का गैर मान्यता प्राप्त झंडा. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स)
नागालैंड का गैर मान्यता प्राप्त झंडा. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स)

7 जनवरी, 2018 के ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नागा पहचान के प्रतीकों को लेकर नागा गुट अड़ गए. नागालैंड ईसाई बहुल राज्य है और वहां चर्च का काफी प्रभाव है. लड़ाकों से इतर चर्च भी नागा राय बनाने और रखने का काम करता है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने सूत्रों के हवाले से उस समय लिखा कि नागालैंड में चर्च इस बात को लेकर गोलबंदी कर रहा है कि नागा प्रतीक नागा पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके बिना नागा पहचान सुरक्षित नहीं है.

19 जुलाई 2018 को नागा शांति समझौते के बातचीत के कुछ प्वॉइंट को संसदीय समिति के सामने रखा गया. पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा के हालात पर बनी संसद की स्थाई समिति के सामने पेश 213वीं रिपोर्ट में सरकार ने कहा, नागा के अलग इतिहास को केंद्र सरकार मान्यता देती है और नागाओं के लिए कुछ विशेष प्रावधान करने की दिशा में विचार कर रही है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि संविधान की धारा 371 के तहत नागालैंड के लिए किए गए विशेष प्रावधानों के साथ सरकार कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी.

नागा शांति समझौते के फ्रेमवर्क ऑफ अग्रीमेंट पर दस्तखत के वक्त बड़ी उम्मीदें लगाई गई थीं. (फोटोःपीटीआई)
नागा शांति समझौते के फ्रेमवर्क ऑफ अग्रीमेंट पर दस्तखत के वक्त बड़ी उम्मीदें लगाई गई थीं. (फोटोःपीटीआई)

एनआर रवि नागा शांति समझौता के वार्ताकार रहे हैं. अब नागालैंड के राज्यपाल हैं. 14 जुलाई 2019 को एनआर रवि ने कहा कि नागालैंड के अलग संविधान और अलग झंडे पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. हालांकि उन्होंने संकेत दिया था कि केंद्र सरकार अलग नागा झंडे पर खुले और लचीले मन से बात करने को तैयार है.

5 अगस्त को आर्टिकल 370 के कुछ प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव संसद में पेश हुआ. इसके बाद एनआर रवि ने नागालैंड के लोगों से कहा, मैं आप लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आप मत घबराइए. धारा 371(ए) नागालैंड के लोगों से किया गया एक पवित्र वादा है. हम मौजूदा राजनीतिक वार्ता की तरफ बढ़ रहे हैं जो अंतिम चरण में है.

सरकार झंडा दे क्यों नहीं देती?

झंडा पहचान का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण होता है. भारत सरकार के नज़रिए से देखें तो ये पहचान का खेल ही नागा संघर्ष की जड़ है. इसलिए केंद्र सरकार इस मामले में सीधे-सीधे कुछ नहीं कर रही है.समझौते के वक्त खबरें आईं कि केंद्र इस बात पर राज़ी था कि एक अलहदा नागा पहचान को मान्यता मिले. लेकिन केंद्र का ये भी मानना था कि झंडे जैसे भावनात्मक (और विस्फोटक) मुद्दों पर नागालैंड की चुनी हुई सरकार काम करे, वो भी शांति समझौता पूरी तरह लागू होने के बाद.


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