पिछले कुछ सालो से समाज के पड़े लिखे युवा चेहरों ने अपने सामाजिक संवैधानिक अधिकारों के लिए खूब मेहनत करी

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पिछले कुछ सालो से समाज के पड़े लिखे युवा चेहरों ने अपने सामाजिक संवैधानिक अधिकारों के लिए खूब मेहनत करी जिसका परिणाम है आज समाज में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बड़ी है साथ मे समाज मे राजनीतिक चेतना भी आई है यह सर्वविदित है कि युवा का नेतृत्व जयस(जय आदिवासी युवा शक्ति) समूह ने किया है जिसे प्रदेश की विधानसभा में भी एंट्री मिली है और जयस के कारण ही आज संविधान की पांचवी अनुसूचि,छटवी अनुसूचि के साथ गंभीर आदिवासी मुद्दों पर चर्चा होने लगी है लेकिन जयस युवाओ की राजनीतिक जनजागरूकता का परिणाम हमे लोकसभा में भी दिखाना चाहिए हमे आदिवासियों के जल जंगल और ज़मीन की लड़ाई लड़ने वाली जयस विचारधारा को संसद में भी पहुचाना होगा क्योँकि संसद में अगर जयस विचारधारा के सांसद पहुचता है यह देश के समस्त आदिवासी समुदायों के लिए गर्व की बात होगी क्योँकि जयस आज पूरे भारत के आदिवासियों को जोड़ने के साथ साथ उनके सुरक्षा और संरक्षण के गंभीर मुद्दों पर काम कर रहा है सभी युवाओ से विशेष अनुरोध है हमें किसी भी राजनीतिक दल के पिछलग्गू बनने की बजाय आदिवासियों के जल जंगल और ज़मीन की लड़ाई लड़ने वाले जयस विचारधारा के युवाओ को लोकसभा में किसी भी कीमत पर भेजना चाहिए और यह सब हम आप सभी के सहयोग से ही संभव है युवाओ से विशेष अनुरोध है इस लोकसभा में कुछ ऐसा काम करे कि इतिहास में जयस युवाओ का संघर्ष हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो जाये
_डॉ हिरालाल अलावा
राष्ट्रीय जयस संरक्षक नई दिल्ली


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