मिशन 2019 में आदिवासी एकता बनेगा बड़ी चुनौती सभी पक्शोके लिए

SHARE WITH LOVE
  • 891
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    891
    Shares

मिशन 2019 में आदिवासी एकता बनेगा बड़ी चुनौती सभी पक्शोके लिए

आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण पर टकराव समूचे भारत में विभिन्न समुदायों को सरकार के खिलाफ एकजुट कर दिया है , तो, अब आगामी चुनावों में आदिवासी नाराजगी बड़ा मुद्दा बनेगी

गुजरात 11 मार्च 2019, अपडेटेड

जल, जंगल, जमीन, स्टेच्यु ओफ यूनिटी, सरदार सरोवर के विस्थापित आदिवासी , झगडिया तालुके में चल रहा आदिवासी जमिनोमे अवैधिक खनिज का कारोबार , भारत माला प्रोजेक्ट में आदिवासी जमीनों पे कब्जा, केवदियामे आदिवासी लोगोपे अत्याचार, आदोलान्करियोकी सभी जगपे होने वाली फर्जी गिरफ्तारिय, पैसा कानून,अनु सूचि ५-६, आदिवासी बहें बेटियों पे हो रहे अत्याचार यह सभी मुद्दोपे आदिवासी समाज साथमे हो चूका है

यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है और अधिकारियों को आदिवासी गांवों में घुसने से रोक रहा है.

यह मुहिम सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है. ये एकदम नए विद्रोह की चिनगारियां हैं, जो समूचे देश के आदिवासी समुदायों को अपने आगोश में ले रही हैं. इसकी लौ पश्चिम में महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रास्ते झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक पहुंच चुकी है.

इसमें में जो चीज आग में घी का काम कर रही है, वह है फारेस्ट ऐक्ट पर सुप्रिमका चुकादा

1996 के पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) कानून या पेसा के प्रावधानों को ठीक ढंग से लागू करने में एक के बाद एक सरकारों की नाकामी.

इस कानून के जरिए संविधान में बताए गए तमाम ‘अनुसूचित इलाकों’ में जमीन अधिग्रहण के साथ-साथ वन संसाधनों के हक के मामलों में फैसलों का अंतिम अधिकार आदिवासी ग्राम सभाओं को दिया जाना था.

आदिवासियों की नाराजगी का सबब यह भी है कि 2006 के वन अधिकार कानून के साथ हर तरीकों से छेड़छाड़ की जा रही है और सरकारी तथा सियासी धड़े आदिवासियों की पहचान को दबाने के लिए छल-कपट भरी कोशिशें कर रहे हैं.

अभी देश में  2019 में लोक सभाके  चुनाव होने हैं इसलिए राज्य सरकारें और खासकर भाजपा के लिए आदिवासी विद्रोह की यह सुगबुगाहट खतरे की घंटी की तरह है. अब ये आंदोलन बिखरे-बिखरे और अलग-अलग लग नहीं रहे  हैं लेकिन यह सांस्कृतिक पहचान के एक तार से जुड़ता है और जमीन को लेकर आदिवासी अधिकारों का साझा हित भी जुड़ा हुआ है. 

टकराव के मुकाम कहा तक पोहचे गे देखिये

देश के मध्य की पूरी चौड़ाई को आदिवासी असंतोष ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है और राजनैतिक आंदोलन और उग्र विद्रोह, दोनों ही स्वरूप अख्तियार कर लिया है

गुजरात

आदिवासी आबादी 14.8%

भरूच,नर्मदा,दाहोद,नवसारी,पञ्च महल,साबरकांठा,सूरत,सुरेंद्रनगर,तापी,दांग,वलसाड,नवसारी,वड़ोदरा,

मध्य प्रदेश

आदिवासी आबादी 21%

आदिवासियों ने या तो जय आदिवासी युवा शक्ति जैसे राजनैतिक गुट बना लिए हैं या फिर उग्र पत्थलगड़ी आंदोलन में सक्रिय है

पश्चिम बंगाल

आदिवासी आबादी 6%

भारत जकत माझी परगना महल 60 संथाली स्कूल चलाता है और पंचायत चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ खड़ा भी हुआ

ओडिशा

आदिवासी आबादी 23%

नियमगिरि पहाडिय़ों को बॉक्साइट की खानों से बचाने के लिए डोंगरिया कोंध समुदाय के कामयाब आंदोलन ने सारी दुनिया का ध्यान खींचा

महाराष्ट्र

आदिवासी आबादी 11%

सर्वहारा जन आंदोलन जैसे समूह चाहते हैं कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले ग्राम सभाओं की मंजूरी ली जाए

झारखंड

आदिवासी आबादी 26%

पत्थलगड़ी आंदोलन सौ से ज्यादा आदिवासी गांवों में फैल चुका है. भूमि अधिग्रहण पर नया कानून आदिवासियों में अविश्वास का एक और आधार

छत्तीसगढ़

आदिवासी आबादी 31%

सूरजपुर और जशपुर जिलों में पत्थलगड़ी आंदोलन. पिछले महीने जशपुर अधिकारियों को कालिया गांव में घुसने से रोका

उलगुलान चालू रहेगा

जय आदिवासी

Dr Bhavin Vasava, Bharuch

 
My Adivasi group
Public group · 296 members
Join Group
we are people to help each other
 

SHARE WITH LOVE
  • 891
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    891
    Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.