आदिवासी क्षेत्रों की जमीन विकास के नाम पर उद्योगपतियो को बाटने की तैयारी कर रही है कमलनाथ सरकार

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आदिवासी क्षेत्रों में गैर आदिवासी की जमीन का होगा डायवर्सन दस साल का बंधन खत्म

आदिवासी क्षेत्रों मे डायवर्सन ख़त्म कर आदिवासियों आदिवासी क्षेत्रों की जमीन विकास के नाम पर उद्योगपतियो को बाटने की तैयारी कर रही है कमलनाथ सरकार भू राजस्व संहिता मे हो रहे संशोधन संशोधन का खुलकर विरोध करेंगे

कमलनाथ सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आदिवासी (अनुसूचित) क्षेत्रों में गैर आदिवासियों को जमीन के डायवर्सन (भूमि के उपयोग) का अधिकार देने का फैसला किया है। इसके लिए भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 और 172 के भाग विलोपित (समाप्त) होंगे। इसके बाद वह बंधन खत्म हो जाएगा, जिसमें सामान्य वर्ग का व्यक्ति दस साल पहले जमीन का उपयोग परिवर्तन नहीं करा सकता था। उधर, राज्य योजना आयोग का नाम स्टेट प्लानिंग एंड पॉलिसी आयोग करने का निर्णय लेते हुए इसे फिर पॉवरफुल बना दिया गया है।

राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कैबिनेट के बाद इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में सामान्य व्यक्ति अपनी भूमि का डायवर्सन नहीं करा सकता था। इसके लिए दस साल का बंधन था। इसके कारण न तो वहां कोई काम हो पाता था और न ही विकास हो पाता था।

यदि कोई व्यक्ति नियम के विपरीत काम करता था तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती थी। अब सामान्य व्यक्ति द्वारा सामान्य व्यक्ति से जमीन खरीदने के साथ ही वह डायवर्सन करा सकेगा। आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी अब भी नहीं खरीद सकेंगे। करीब एक माह में फैसले की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

उधर, एक अन्य निर्णय में राज्य योजना का नाम स्टेट प्लानिंग एंड पॉलिसी आयोग करने के साथ संस्था को अधिकार संपन्न् बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत आयोग योजनाओं की समीक्षा करेगा और कार्ययोजना बनाएगा। इसके सुझाव विभागों के लिए बंधनकारी होंगे। दोराय होने पर अंतिम निर्णय कैबिनेट करेगी।

केके कातिया की संविदा अवधि बढ़ाने पर असहमति

बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव केके कातिया की संविदा अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट में सहमति नहीं बनी। सूत्रों का कहना है कि विभागीय मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के असहमति जताने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रस्ताव को रोक दिया।

बताया जा रहा है कि कमजोर आर्थिक वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के आदेश से भ्रम की स्थिति निर्मित होने को सरकार ने गंभीरता से लिया। आदेश से यह संदेश गया कि जुलाई 2019 के बाद के पदों पर ही 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिलेगा। जबकि, सरकार का पक्ष साफ है कि दो जुलाई के बाद जो भी चयन परीक्षा होगी, उसमें यह आरक्षण लागू होगा।

कैबिनेट के अन्य फैसले

  • राज्यपाल के निजी सचिव के रूप में संजय चौधरी और निज सहायक पद पर विनय जोशी की नियुक्ति को मंजूरी।
  • मुख्यमंत्री के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी पद पर सुनील बजाज की नियुक्ति को हरी झंडी।
  • सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव फजल मोहम्मद और अनुभाग अधिकारी राधेश्याम दुबे की संविदा अवधि बढ़ाने का निर्णय।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भोपाल के शाहपुरा में 0.188 हेक्टेयर भूमि नि:शुल्क दी।
  • कोकाकोला कंपनी को होशंगाबाद के बाबई में आवंटित जमीन की फीस चुकाने में देर पर लगे 89 लाख रुपए ब्याज की माफी।
  • नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नेस्कॉम) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू को हरी झंडी।
  • गौण खनिज की रॉयल्टी और अनिवार्य भू-भाटक की दरों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

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