नर्मदा: सरदार सरोवर, स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के आदिवासी आन्दोलन थप, चुप है BTP/BJP/cong…

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BTP भारतीय ट्रायबल पार्टी, BJP भारतीय जनता पार्टी, congress ंकोग्रेस आदिवासी आगेवान भी चुप….! क्यों चुप हो गए सब? क्या केवड़िया के आदिवासी को उनका हक़ मिल चूका है? या फिर कुछ और बात है? जब की यह विस्तार तो महेश वसावा / छोटू वसावा (Mahesh vasava and Chhotu vasava) की भारतीय ट्रायबल पार्टी BTP का घढ़ है

बात यह है की जोर सोर से चल रहे आन्दोलनों को कुचल दिया गया है. और कहने वाली आदिवासी पार्टी एवम आदिवासी नेता सब अपने अपने जुगाड़ में लग चुके है, कई आंदोलन कारी को येन केन तरहासे प्रतारित करके चुप करवा दिया गया है और कई लोभ लालच में फसे है.

केवड़िया के विस्थापित आदिवासी को उनका हक़ अभी मिला नहीं है. कोन आएगा उनके हक़ और अधिकार को दिलवाने के लिए ? क्या सभी बिक चुके है? कोय तो होगा जो इन आदिवासी की मदद के लिए अपना सबकुछ भुलाके किसीभी लोब लालच के बगेर इन लोगोका हक़ दिलायेगा.

कल जब Gujarat government के मुख्य मंत्री ने केवड़िया में रिवर द्रार्फ्टिंग, केक्टस गार्दन, सफारी पार्क , बटरफ्लाई पार्क वगेरा की बात की . जो यह बहुत अछि – अछि बात कही  हे वो बहुत ही अछि बात है. राज्य और राट्र का डेवलपमेंट होनाही चाहिए. ये जरुरी है. पर स्थानिक लोगो का क्या ? स्थानिक और गरीब लोगोको सबसे आगे रखना चाहिए, उनको उनका हक़ – अधिकार मिलानाही चाहिए.

केवड़िया के स्थानिक लोग अपनी जमीने, अपना घरबार, अपने संविधानिक अधिकार वगेरा छोड़ रहे है, बदलेमे उन्हें क्या मिल रहा है? ना रोजगार , ना नोकरिया ….!

कुछही समय में भारत के वाडा प्रधान श्री नरेद्र मोदीजी केवड़िया में आने वाले है उनके सामने आदिवासी लोगोकी आवाज बनके कोन आगे आये गा ?

जिन भारतीय ट्राइबल पार्टी BTP ने आपनी बहन-बेटियों की रक्षा, आदिवासी हित की बाते इलेक्सन से पहले कीथी कहा गए उनके वादे? क्या हुवा उन वादोका ? आज वो वादे क्या भाप बन के उड़ चुके है ? या फिर भुला दिए गए है?

बीजेपी कोंग्रेस क्यों आदिवासी के हक़ की बात आती है तो चुप हो जाते है. ये लोग भी वादे करते है और भूल जाते है

मेरे विचार से तो ऐसे वादे करने वाले लोगोको जवाब देनाही चाहिए, जो लोग अपने खुदके समाज के नाम पर आपनी रोटिय सकते है. क्या नहीं है उनके पास आज समाज ने उनको सबकुछ दिया है. समाज के नाम पर बहुत है उनके पास आज बस अब उन्हें समाजके बारेमेभी तो सोचना चाहिए. कबतक समाज के नाम पर राजनीती करते रहोगे..?

अब बहुत हुआ इन लोगोका समाज का हर बचा बचा , युवा, बुजुर्ग एवम महिलाये आगे आये गी और ऐसे समाज के नाम पर राजनीती करने वालोको सबक सिखाएगी. आदिवासी लोगोको इन दोगले लोगोपे विस्वास न करते हुए अपनी लढाई खुद लढनि होगी.

कोर्ट से स्टे तो मिलही गयाहै इसमे न कोय आदिवासी पार्टी ने मदद की न कोय राज नेता कोर्ट से स्टे मीला है तो वो आदिवासी लोगोने लिया है. तो चलो अपने बलबूते से आगे बढे और ऐसी राजकारणी पार्टी और लोगो को छोडके आगे बढे.

जोहर, जय आदिवासी

डॉ. भाविन वसावा भरूच

૭ ડીસેમ્બર ૨૦૧૭ સભા

Posted by Saurabh Vasava on Thursday, December 7, 2017

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