CAA: असम में आंदोलन के लिए किसानों का ‘धान का दान’

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धान का दान कार्यक्रम से आंदोलन को पैसा और लोगों में आधार दोनों मिल रहा है.

असम में नागरिकता संशोधन क़ानून यानि CAA के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई के लिए किसान धान का दान दे रहे हैं. शनिवार को इस धान की निलामी होनी थी, लेकिन इसको टाल दिया गया. आयोजकों ने इसकी वजह बताई कि अभी भी बहुत सारे किसान धान के बोरे लेकर पहुंच रहे हैं. 


असम के पूर्वी ज़िले डिब्रुगढ़ में किसानों के धान को ख़रीदने और इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए हज़ारों की तादाद में लोग जुटे थे. इन लोगों में कई राइस मिल मालिक भी थे. इस आंदोलन को चला रहे लोगों का कहना है कि इस धान से जो भी पैसा जमा होगा उसका इस्तेमाल सीएए के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई के लिए किया जाएगा. 

ऑल असम स्टूडेन्ट्स यूनियन के आह्वान पर डिब्रुगढ़ के 85 गांवों में किसानों के हर परिवार ने एक दून यानि चार किलो धान का दान दिया है. AASU ने फ़ैसला किया है कि वो 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में CAA के ख़िलाफ़ याचिका दायर की जाएगी. 


आसू (AASU) के अनुसार शनिवार सुबह तक कुल 645 बोरा धान जमा हो चुका था. इसके बाद भी किसान लगातार धान लेकर पहुंच रहे हैं. इसलिए धान की निलामी को फ़िलहाप टाल दिया गया जिससे सभी किसान धान का दान कर सकें. 

शनिवार को आसू के महासचिव लुरिनज्योति गगोई ने रैली को संबाधित करते हुए कहा कि जिस तरह से किसानों ने धान का दान दिया है उससे वो अभिभूत हैं. इसके साथ ही उन्होने कहा कि किसी किसान ने कितना सहयोग किया उसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती वो तो बेशकीमती है.

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