झारखंड में शहीदों के आश्रितों को नौकरी देगी सरकार, सीएम हेमंत ने किया बड़ा ऐलान

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief minister of Jharkhand) ने खरसावां गोलीकांड (Kharsawa Massacre) के शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. सोरने (Hemant Soren) बुधवार को खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रृद्धांजलि देने पहुंचे थे.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief minister of Jharkhand) ने खरसावां गोलीकांड (Kharsawa Massacre) के शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. सोरने (Hemant Soren) बुधवार को खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रृद्धांजलि देने पहुंचे थे. सोरेन ने याद दिलाया कि जब वो पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे तब गुवा गोलीकांड के शहीदों के परिजनों को खोज-खोज कर नौकरी दी थी. खरसावां में जिन शहीदों के परिजन नौकरी करने की स्थिति में नहीं होंगे उन्हें पेंशन दी जाएगी.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खरसावां गोलीकांड से जुड़े दस्तावेज खोज कर निकाले जाएंगे. इन दस्तावेजों के आधार पर शहीदों की पहचान होने के बाद उनके परिजनों को राहत देने का काम शुरू किया जाएगा.

सीएम हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी विधायकों और नेताओं के साथ शहीद स्थल व केरसे मुंडा शिलापट्ट पर जा कर श्रद्धांजलि अर्पित की. खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद सीएम ने आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान में जनसभा की. इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार की कैबिनेट की पहली बैठक में लिये गये निर्णय में एक संदेश है. अब सिर्फ वही काम होगा, जो राज्य हित में होगा. यहां सिर्फ आदिवासियों और झारखंडियों के हित में निर्णय लिये जायेंगे. झारखंड में कोई व्यक्ति भूखा नहीं मरेगा. सबको अनाज सरकार देगी.

क्या है खरसावां गोलीकांड

खरसावां गोलीकांड को आजाद भारत के इतिहास का सबसे विभत्स गोलीकांड माना जाता है. यह गोलीकांड एक जनवरी 1948 को हुआ था. वह गुरुवार का दिन था. इस दिन खरसावां में हाट बाजार लगता था. उडिशा सराइकेला और खरसावां स्टेट को उड़िया भाषी होने के नाम पर उडिशा में मिलाना चाहते थे. लेकिन यहां के स्थानीय आदिवासी न तो उडिशा में मिलना चाहते थे और न ही बिहार में.

खरसावां आदिवासियों की मांग अलग झारखंड राज्य की थी. आदिवासियों के नेता जयपाल सिंह मुंडा को सुनने के लिए आसपास के इलाके से हजारों की संख्या में बच्चे बूढ़े जवान सब इस हाट-बाजार में इकट्ठा हुए. इस दौरान हो रही नारेबाजी के बीच लोग कुछ समझ नहीं पाए और अचानक एक गोली की आवाज आई. इस गोलीकांड में बड़ी संख्या में लोग मारे गए.

इस जगह पर यहां के राजा रामचंद्र सिंहदेव का बनावाया हुआ एक कुंआ था. गोलीकांड में मारे गए और घायल हुए लोगों को इसी कुंए में डालकर उसे ढक दिया गया. आज यहीं शहीद स्थल है.


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