भरूच: मुख्य मंत्री विजय रुपाणि पे ज़घदिया तहसीलके लोग लगा रहेहे आक्षेप – जानिए क्यू ?

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भरूच जिल्ले के झगडिया तालुकेमे आदिवासी लोगोपे ओर आदिवासी जमीनों पे सरकार के खनिज विभाग द्वारा अत्याचार हो रहाहे. राज्य सर्कार के विभाग  द्वारा यहापे आदिवासी लोगोके साथ खिलवाड़ हो रहाहे. सभी संगठनो से निवेदन हे की इन लोगोकी सहाय के लिए आगे आये. ओर यहाके बेबस लाचार लोगोके साथ सर्कार के विभागों द्वारा हो रहे अत्याचार ओर सोसन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यहाके लोगोकी सहाय ता करे.

दरअसल मजबूत नेतृत्व की हमारी परिभाषा केवल कुछ मुद्दों तक ही सीमित कर दी गई है। इनमें हमारे आदिवासी अस्तित्व से ताल्लुक रखने वाले एवम पर्यावरण के गंभीर मुद्दों को कोई जगह ही नहीं है।

भरूच जिल्ले के झगडिया तालुकेमे आदिवासी विस्तार में हजारो हेक्टर जमीन से लाखो मेट्रिक टन सिलिका, काला पथथर, कोयला इत्यादि निकला जा रहाहे. सभी नियमोकी अनदेखी करके यहापे यह खदाने एवम क्र्सर चल रहे है.

રૂપાણી સરકાર દ્વારા આદિવાસી નું સોસન ભરૂચ જીલ્લાના ઝગડિયા તાલુકામાં થય રહ્યું છે

Posted by DrBhavin Vasava on Monday, 4 February 2019

नोटबंदी व जीएसटी जैसे फैसले रातोंरात ले लिए जाते हैं, लेकिन बात जब खदाने , प्रदूषण या औद्योगिक त्रासदी की होती है तो सख्त फैसले की इच्छाशक्ति क्यों दम तोड़ देती है?

अब दोबारा गुजरात पर आते हैं। जनता और राजनेता कम से कम सख्त उपाय मसलन नोटबंदी और अचानक लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर बात कर रहे हैं। भले ही इसे लोगों का समर्थन न मिले लेकिन बहस और चर्चाओं का लहजा सकारात्मक है। तर्क दिया जा रहा है कि आपात स्थितियों में सख्त उपायों की जरूरत होती है।

लेकिन जब बात भरूच में हो रहे खनन, प्रदूषण या औद्योगिक त्रासदी की बात होती है तो बहस को यह दलील देकर समाप्त कर दिया जाता है कि ये इक्कादुक्की घटनाएं हैं और पर्यावरण की चिंताएं विकास को नहीं रोक सकतीं। विकास बनाम पर्यावरण के बीच यह एक तरह का ध्रुवीकरण है। इस ध्रुवीकरण में पर्यावरण के प्रति हमारी चिंताएं विकास के आगे नतमस्तक कर दी जाती हैं।

उदाहरण के लिए अवैधिक खाननो   पर रोक से विकास की गति थम जाएगी। इसी तरह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों में भी पर्यावरण की चिंताओं को कभी जगह नहीं दी जाती। ये चिंताएं उन स्थानीय आदिवासी समुदायों द्वारा जाहिर की जाती हैं जिनकी जमीन और जलस्रोत निजी व्यवसाय की खातिर लिए जाते हैं।


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