अखिलेश यादव ने कहा कि चार सालों की घोर उपेक्षा के बाद सीएम योगी को सैफई की याद आई

SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मध्य प्रदेश में कोविड-19 के साथ-साथ अब ब्लैक फंगस भी तेजी से पैर पसार रहा है। दूसरी लहर में कोविड-19 पर ब्लैक फंगस भारी पड़ता नजर आ रहा है। इस रोग से वैसे कोई राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है, क्योंकि इसकी दवा मार्केट में नहीं है। एक ओर मरीजों के परिजन दवा के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार बंदोवस्त भी पूरे होते नहीं दिखाई दे रहे। अभी तक कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

इस जानलेवा रोग की चपेट में आए करीब 600 मरीज प्रदेश के भिन्न-भिन्न सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल ों में उपचार करा रहे हैं। सबसे अधिक मरीज इंदौर औऱ भोपाल में हैं। प्रदेश के 8 मेडिकल कॉलेज में 361 मरीज भर्ती हैं। जानकारी के मुताबिक, जीएमसी भोपाल में 90, एमएमजीसी इंदौर में 164, जीआरएमसी ग्वालियर में 24, एनएससीबी जबलपुर में 58, एसएसएमसी रीवा में 15, बीएमसी सागर में 7, जीएमसी खंडवा में 1 और सीआईएमएस छिंदवाड़ा में 2 मरीज भर्ती हैं।

इंजेक्शन की कमी, ऑपरेशन की पेंडेंसी बढ़ी

बताते चलें कि राजधानी भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में में 90 मरीजों के साथ बेड फुल हो चुका है। ब्लैक फंगस के मरीजों को 3 दिन से इंजेक्शन नहीं लग रहे हैं और ऑपरेशन की पेंडेंसी बढ़ रही है। इस अव्यवस्था की वजह से कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रत्येक दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मरीजों की संख्या के मुताबले एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन पूरी नहीं पड़ पा रही।
7 दिन तक इंजेक्शन लगना जरूरी

जिस ढंग से बीते दिनों कोविड-19 के उपचार के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत थी, अब वैसे ही ब्लैक फंगस के उपचार और उसके संक्रमण रोकने के लिए लगाए जाने वाले एंफोटेरिसिन- बी लाइपोसोमेल इंजेक्शन की कमी है। ब्लैक फंगस के मरीज को एक दिन में चार डोज लगते हैं। आरंभ में 7 दिनों तक इंजेक्शन लगना महत्वपूर्ण है। एक इंजेक्शन की मूल्य 5 से 7 हजार रुपए है। लेकिन, यह इंजेक्शन बाजार में मौजूद नहीं है।

मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान इस मुद्दे में मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। जानकारी मुताबिक आयोग के ऑफिसरों ने बताया कि भोपाल में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों में अनेक कारणों से ब्लैक फंगस फैल रहा है। शहर के सरकारी और निजी हॉस्पिटल में मरीज भर्ती हैं। अब तक कई मरीजों की मृत्यु भी हो चुकी है। सरकारी व्यवस्था ऐसी है कि एंफोटेरिसिन- बी लाइपोसोमेल इंजेक्शन भी नहीं मिल रहा।

जानकारी मिली है कि इस वजह से मरीज हॉस्पिटल ों में तड़पते रहे। परिजन हॉस्पिटल ों और फार्मा कम्पनी वालों से पूछ-पूछकर परेशान होते रहे कि ये इंजेक्शन कब मिलेंगे, परन्तु कोई उत्तर नहीं मिला। ये इंजेक्शन आउट आफ स्टॉक बताया गया। आयोग ने प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल से प्रदेश में ब्लैक फंगस पीडितों के लिए महत्वपूर्ण दवाओं की समुचित व्यवस्था और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दस दिन में मांगी है।

Source link


SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •