गिर बरडा आलेच के रबारी, भरवाड, चारण को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के लिए सांसद मनसुख वसावा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा।

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गिर बरडा आलेच के रबारी, भरवाड, चारण को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के लिए सांसद मनसुख वसावा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा।

प्रति,                                                                                         दिनांक: 19 सितम्बर, 2020

श्री रामनाथ कोविन्द जी, माननीय राष्ट्रपति, भारत गणराज्य, नई दिल्ली।

आदरणीय महोदय,

गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बहुत सारे आदिवासी संगठनो के नेता आपस में प्रत्यक्ष रूप से मिलकर तथा फोन पर बातचीत के माध्यम से फर्जी आदिवासियों को एस.टी. कोटे से हटाने की मांग कर रहे है। इसी तरह के गुजरात के एक आदिवासी संगठन भावनगर आदिवासी विकास परिषद ने इस विषय को लेकर अपनी मांग से संबधित आपको सम्बोधित प्रतिवेदन दिया है जिसमें कहा गया है कि उपरोक्त राज्यों में कई लोग आदिवासी न होते हुए भी आदिवासी कोटे के सरकारी लाभ प्राप्त कर रहे है तथा कई पिछड़ी जातियों के लोग सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए आदिवासी कोटे में आने की कोशिश कर रहे है। अस्तु उपरोक्त लोगो की समस्याओं की वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए मैं आपके कृपा पूर्ण हस्तक्षेप हेतु निम्न पत्र आपको प्रेषित कर रहा हूँ।

गुजरात में जूनागढ़ जिले के गिर बरडा और आलेच क्षेत्र के रबारी, भरवाड तथा चारण जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया है। उक्त लोगों के 400 ऐसे परिवारों को 29/10/1956 के राष्ट्रपति के आदेश से अनुसूचित जनजाति माना गया है किन्तु समय के साथ निम्न बताए गए कारणों से उनको अनुसूचित जनजाति की सची से हटाया जाए:

  1. तत्कालीन समय में उन लोगों में आदिवासी लक्षण नहीं थे परन्तु गिर बरडा और आलेच के वन क्षेत्रों के नेसो में रहने वाले लोगों की जीवन शैली आदिवासियों जैसी नहीं होने के बावजूद उन्हें आदिवासी माना गया क्यों कि पहाड़ों में रहने की वजह से इनको जीवनयापन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब से लोग नेस एरिया में नहीं रहते है बल्कि अधिकांश लोग रबारी समाज में मिल गए हैं। इसलिए उनको अनुसूचित जनजाति सूची से हटाया जाए।
  2. दिनांक 1/4/1978 से उपरोक्त सभी को ओबीसी कैटेगरी के तहत और रबारी जातियों को ओबीसी कोटे के आरक्षण का लाभ मिल रहा है। अतः गिर, बरडा तथा आलेच के नेस में रहने वाले भरवाड आदि को ओबीसी में शामिल करके एस.टी. सूची से हटा दिया जाए।
  3. एक ही जाति के लोग अनुसूचित जनजाति और ओबीसी में होने की वजह से अनुसूचित जनजाति के अवैध प्रमाण पत्र लेकर असली आदिवासियों का हक मार रहे हैं।
  4. आदिवासी संशोधन एवं तालीम केन्द्र गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद ने 1988 की रिपोर्ट में रबारी, भरवाड एवं चारण आदि लोगों में आदिवासियों के लक्षण नहीं होने का उल्लेख अपनी रिपोर्ट के पैरा सं. 6465 में किया
  5. उपरोक्त संदर्भो के साथ ही कच्छ के वाघरी, कोली, और परधी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटा दिया गया है ओर उनको ओबीसी में शामिल कर लिया गया है। अतः इस अति महत्वपूर्ण विषय के परिप्रेक्ष्य में आपसे निवेदन है कि आप उपरोक्त सभी संदर्भो को संज्ञान में लेते हुए गिर, बरडा और आलेच के नेस क्षेत्र के लोगों को एस.टी. कोटे से हटाकर ओबीसी में शामिल करने हेतु तत्काल उपयुक्त कदम उठाने की कृपा करें ताकि वर्षों से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए देश के आदिवासियों को उनके उत्थान के लिए संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पूर्ण अधिकार प्राप्त हो सकें।

सादर,

भवदीय,

Posted by Mansukh Vasava on Saturday, November 14, 2020

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