गृह मंत्री अमित शाह का अकाउंट ब्‍लॉक करने पर संसदीय समिति ने की ट्विटर की खिंचाई

SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

संसदीय समिति (Parliamentary Committee) के समक्ष पेश हुए फेसबुक (Facebook) और ट्विटर (Twitter) के अधिकारियों को गुरुवार को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा कि उन्‍होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) का अकाउंट नवंबर में ब्‍लॉक क्‍यों किया था. गुरुवार की मीटिंग का एजेंडा नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण, सोशल मीडिया न्‍यूज प्‍लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना और महिला सुरक्षा से संबंधित था लेकिन सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों से सवाल किया गया कि शाह का ट्विटर अकाउंट क्‍यों ब्‍लॉक किया गया और ऐसा करने का अधिकार किसने दिया. इस पर ट्विटर के अधिकारियों ने जवाब दिया कि पोस्‍ट किए गए एक फोटो के कॉपीराइट मामले के कारण उन्‍हें अस्‍थायी तौर पर अकाउंट ब्‍लॉक करने को मजबूर होना पड़ा.

यह भी पढ़ें

माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट के प्रवक्‍ता ने कहा, ‘जब शाह का अकाउंट ब्‍लाक किया गया तो ट्विटर ने इसकी कॉपीराइट पॉलिसी के अंतर्गत अनजाने में त्रुटि (inadvertent error) के रूप में व्‍याख्‍या की थी. इस फैसले को फौरन बदल दिया गया था और अब यह अकाउंट पूरी तरह से कार्य कर रहा है.’ हेट स्‍पीच और अमेरिका में कंटेंट की निगरानी और इसे हटाए जाने को लेकर हुए भारी विवाद के संदर्भ में कुछ सदस्‍यों ने सवाल किया कि सोशल मीडिया कंटेट को किस तरह से हटा सकता है जब इसके खिलाफ भारत में कोई नियम नहीं है.

ट्विटर और इसकी पेरेंट कंपनी, दोनों ने कहा कि कंटेट को लेकर उनके बेहद सख्‍त नियम हैं और वे जरूरत पड़ने पर उस कंटेंट को हटा देंगे जिससे उन्‍हें हिंसा को बढ़ावा मिलने का अंदेशा होगा. इस नियम को हाल ही में उस समय समय अमल में लाया गया जब वॉशिंगटन डीसी में कैपिटॉल हिल में हिंसा के बाद ट्विटर में अमेरिकी राष्‍ट्रपति (तत्‍कालीन) डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) के अकाउंट को ब्‍लॉक कर‍ दिया था

भारत के बात करें तो यहां फेसबुक सितंबर माह में उस समय विवादों में घिरा था जब वाल स्‍ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में कहा गया था कि यह सत्‍ताधारी बीजेपी और दक्षिणपंथी नेताओं की ओर से पोस्‍ट किए जा रहे हेट स्‍पीच की अनेदेखी कर रहा है.

Source link


SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •