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What Is TDS In Water:  चाइना की सीमा से लगे पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में एक नदी के पानी के आकस्मित काला पड़ने की समाचार से हर कोई स्तब्ध है रिपोर्ट के अनुसार कामेंग नदी में ऐसा हुआ और इस कारण लाखों मछलियां कुछ ही देर में मर गईं यह घटना प्रदेश के ईस्ट कामेंग जिले की है इसके बाद हुई जाँच से पता चला कि नदी के पानी में आकस्मित से टीडीएस की मात्रा बहुत ज्यादा अधिक बढ़ गई थी इस कारण ये मछलियां मर गईं वह सांस नहीं ले पा रही थीं

क्या होता है टीडीएस
दरअसल, यह एक बहुत आम शब्द है यह अंग्रेजी के शब्द टोटल डिजॉल्व सॉलिड (Total Dissolved Solids) संक्षिप्त रूप है इसका मतलब यह है कि पानी में घुले हुए कण या ठोस पदार्थ की सांद्रता या जमाव (concentration) कितना है टीडीएस में इनऑर्गेनिक सॉल्ट यानी कैल्शियम, मैग्नेशियम, क्लोराइड, सल्फेटस, बाइकार्बोनेट्स आदि पदार्थ होते हैं इसके अतिरिक्त इसमें अन्य कई इनऑर्गेनिक पदार्थ भी हो सकते हैं टीडीएस से पानी के खारापन का पता चलता है जिस पानी में जितना अधिक टीडीएस होगा वह उतना ही अधिक खरा होगा

पीने के पानी में कितना होना चाहिए टीडीएस
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रति दस लाख कणों (parts per million) में टीडीएस की मात्रा 300 तक होने पर उस पानी को पीने योग्य बताया है इससे संक्षेप में पीएमपी बोला जाता है इस तरह टीडीएस की माप पीएमपी में होती है पानी में 300 पीएमपी से अधिक टीडीएस होने वह उसका स्वाद नमकीन लगेगा और उसमें मिनरल्स की मात्रा बहुत ज्यादा अधिक होगी इससे हमारे शरीर को नुकसान हो सकता है वहीं दूसरी तरह पीने के पानी में शून्य या न के बराबर टीडीएस भी हानिकारक है क्योंकि हमारे शरीर को कई तरह के मिनरल्स की जररूत है ऐसे में पानी से इन मिनरल्स की पूर्ति होती है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में 1000 पीएमपी के स्तर को खतरनाक करार दिया है

हिमाचल के नदी में कैसी बढ़ी टीडीएस की मात्रा
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जिला मत्स्य पालन ऑफिसर (डीएफडीओ) हाली ताजो ने बताया है कि ‘कुल उच्च घुलित पदार्थ’ (टीडीएस) की उच्च मौजूदगी से नदी का पानी काला पड़ गया उन्होंने बताया कि हजारों मछलियां नदी में मृत मिलीं बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के पीछे की वजह टीडीसी की बड़ी मात्रा में मौजूदगी है, जिससे नदी के जीवों के लिए दृश्यता कम होती है और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगती है

नदी में टीडीएस का स्तर 6,800 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो सामान्य तौर पर 300-1,200 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है सेप्पा के लोगों ने इसके लिए चाइना पर आरोप लगाया, उनका बोलना है कि पड़ोसी देश की निर्माण गतिविधियों की वजह से नदी का रंग काला पड़ गया इस पर चिंता जाहीर करते हुए सेप्पा ईस्ट के विधायक तापुक टाकु ने बोला कि इससे पहले कामेंग नदी में कभी ऐसा नहीं हुआ था

इससे पहले 2017 में हुई थी ऐसी घटना
रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले 2017 में सियांग नदी में ऐसा हुआ था और अरुणाचल ईस्ट के कांग्रेस पार्टी सांसद निनोंग एरिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की थी उनका दावा था कि चाइना में बहुत ज्यादा लंबी सुरंग के निर्माण की वजह से ऐसा हुआ है क्योंकि इसने शिनजियांग प्रांत में सियांग के पानी को मोड़ दिया है हालांकि, चाइना ने इस आरोप से मना किया था

टीडीएस कम करने के क्या हैं तरीका
आमतौर पर भूजल में डीटीएस की मात्रा बहुत ज्यादा अधिक होती है यह बहुत ज्यादा हद तक जगह-जगह और भूजल की गहराई पर निर्भर करता है कई इलाकों में पानी का एकदम स्वच्छ और बहुत ज्यादा मीठा होता है इसका मतलब है कि वहां पानी में टीडीएस की मात्रा कम है शहरों में नगरपालिका द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी और स्थिर पानी में टीडीएस की मात्रा कम होती है इसके अतिरिक्त इन दिनों मार्केट में तरह-तरह के आरओ वाटर प्यरिफायर मौजूद हैं जो पानी में डीटीएस की मात्रा को तीन से चार गुना तक कम कर देते हैं यानी यदि किसी पानी टीडीएस की मात्रा 1200 पीएमपी है तो उसे आरओ सिस्टम सरलता से 150-200 के स्तर पर ला सकता है

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