“मोदी साब ने कैमरे लगवा दिए हैं, जो भाजपा को वोट नहीं देगा उसका पता चल जाएगा”:रमेश कटारा

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मेनका गांधी का एक ‘भाई’ गुजरात में मिला है!

उन्होंने ये पूरा बयान गुजराती में दिया. इस बयान को देते वक्त वो भाजपा का प्रचार कर रहे थे और दाहोद (गुजरात) के भाजपा उम्मीदवार जसवंत सिंह भाभोर को वोट देने की बात कह रहे थे.

भाजपा विधायक यहीं नहीं रुके. जोश-जोश में कुछ ऐसा कह गए जिसकी शायद उन्हें उम्मीद ही नहीं थी. उन्होंने तो खुद नरेंद्र मोदी पर ही आरोप लगा दिया.

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“मोदी साब ने कैमरे लगवा दिए हैं, जो भाजपा को वोट नहीं देगा उसका पता चल जाएगा”

ये लाइन पढ़कर ही शायद आपको अजीब लगे, लेकिन वाकई इस भाजपा एमएलए ने ऐसी बातें कही हैं और ये इल्जाम लगाया (उनके हिसाब से वो तारीफ कर रहे थे शायद) कि नरेंद्र मोदी ने पोलिंग बूथ पर कैमरे लगवा दिए हैं और जो कांग्रेस को वोट देगा, जो भाजपा को वोट देगा उसकी जानकारी मिल जाएगी. आजकल तो आधार कार्ड और अन्य कार्ड में फोटो वगैराह सब होती है. अगर आपके बूथ से कम वोट मिले तो उन्हें पता चल जाएगा कि किसने किसे वोट दिया है और फिर काम नहीं मिलेगा.

क्या सच में CCTV होते हैं पोलिंग बूथ में?

इस बार से ऐसा किया जा रहा है कि पोलिंग बूथ में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं. ये मोदी जी नहीं बल्कि चुनाव आयोग करवा रहा है. और वो वोटर को देखने के लिए नहीं बल्कि चुनाव ड्यूटी कर रहे अधिकारियों को देखने के लिए है. चुनाव आयोग ने खास तौर पर ये निर्देश दिए हैं कि वोटर की पहचान छुपाई जाएगी. इन्हें लगवाने का कारण है ताकि ये देखा जा सके कि चुनाव प्रक्रिया सही चल रही है या नहीं.

इसमें कहीं भी नरेंद्र मोदी का हाथ नहीं है और ये तो कोई नहीं देख सकता कि वोट किस पार्टी को दिया गया है. पर शायद इसकी जानकारी विधायक जी को नहीं थी या तो उन्होंने सोचा कि इसकी जानकारी उन्हें सुनने वाली जनता को भी नहीं है तो जो भी बोला जाएगा वो सही है.

भाजपा विधायकों के इस तरह के बयान इन आम चुनावों में कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन यकीन मानिए ये कुछ नया ही था. अगर किसी भाजपा विधायक को ये भी नहीं समझ आ रहा है कि वो ऐसा बोलकर एक तरह से प्रधानमंत्री पर चुनावों में गलत तरीके से वोटरों की जानकारी पाने की कोशिश करने का इल्जाम लगा रहा हैं तो उन्हें विधायक बने रहने का कितना हक है ये तो नहीं पता.

यकीनन जब कटारा जी कह रहे थे कि, ‘कोई गलती नहीं होनी चाहिए, भाजपा को ही वोट पड़ने चाहिएं’ तब वो ये नहीं जानते थे कि सोशल मीडिया के इस युग में जहां वो जनता को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं वहां लगभग हर भारतीय के पास मोबाइल फोन हैं और वो जल्दी ही ब्रेकिंग न्यूज बन सकते हैं. अब खुले आम लोकतंत्र के सबसे बड़े चुनाव और चुनाव प्रक्रिया की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो इतना तो बनता ही है.

या तो कटारा जी को चुनाव आयोग के नियमों की जानकारी नहीं थी या फिर उन्हें चुनावों की जानकारी ही नहीं थी जो वो आसानी से ये कह गए कि वोटरों की पहचान हो जाएगी. जब्कि चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि वोटर की पहचान गुप्त रखना अनिवार्य है. और इस तरह की धमकी देने वालों को पहले ही चुनाव आयोग सज़ा दे चुका है. हाल ही में मेनका गांधी को भी तो इसी तरह का भाषण देने और मुस्लिम वोटरों को धमकाने के लिए चुनाव आयोग ने 48 घंटों के लिए चुनाव प्रचार से बैन कर दिया है. अब कटारा जी पर भी चुनाव आयोग का ध्यान जाता है या नहीं ये तो बाद की बात है, लेकिन यकीनन कटारा जी ने अच्छा-खासा विवाद खड़ा कर दिया.

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