Oxygen Express: तेज होगी ऑक्सीजन की आपूर्ति, राष्ट्रीय इस्पात निगम के कारखाने से महाराष्ट्र के लिए निकली आक्सजीन एक्सप्रेस

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नई दिल्ली। भारतीय रेल कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई के तहत ऑक्सीजन एक्सप्रेस का संचालन कर रही है। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) टैंकरों के साथ पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस विशाखापट्टनम से मुंबई के लिए अपनी पहली यात्रा शुरू करने जा रही है। विशाखापट्टनम पर एलएमओ से भरे टैंकरों की भारतीय रेल की रो-रो सेवा के माध्यम से भेजा जा रहा है। ऑक्सीजन एक्सप्रेस की तेज आपूर्ति में ग्रीन कॉरिडोर से सहायत मिल रही है। लखनऊ से वाराणसी तक की 270 किमी की दूरी 62.35 किमी प्रति घंटे की गति से 4 घंटे 20 मिनट में तय करने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया था।

राष्ट्रीय इस्पात निगम के कारखाने से महाराष्ट्र के लिए निकली आक्सजीन एक्सप्रेस 

सरकारी क्षेत्र के उपक्रम राष्ट्रीय इस्पात निगम लि. (आरआईएनएल) ने गुरुवार को कहा कि उसके विशाखापत्तपनम कारखाने से चिकित्सकीय उपयोग लायक 100 टन आक्सीजन महाराष्ट्र के लिए प्रस्थान कर चुकी है। कंपनी ने ट्वीटर पर कहा, ‘ आरआईएनएल के विशाखापत्तनम कारखाने से पहली अक्सीजन एक्सप्रेस महाराष्ट्र के लिए छूट चुकी है। इसमें 100 टन तरल चिकित्सकीय आक्सीजन लदा है जो वहां कोविड19 के मरीजों की जरूरत के लिए है।’ आरआईएनएल अब तक हर रोज 100 टन तरल आक्सीजन आंध्र प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों को भेज रहा था। एक सप्ताह में कंपनी ने उपचार के काम के लिए करीब 800 टन आक्सीजन की आपूर्ति की है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा , ‘हम मांग आने पर प्रतिदिन 100 से 150 टन आक्सीजन की आपूर्ति कर सकते हैं।

एक अन्य ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने उत्तर प्रदेश में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए वाराणसी के रास्ते लखनऊ से बोकारो के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। ट्रेन की यात्रा के लिए लखनऊ से वाराणसी के बीच एक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया था। ट्रेन ने 270 किलोमीटर की दूरी 62.35 किमी प्रति घंटा की औसत गति के साथ 4 घंटे 20 मिनट में तय की थी। ट्रेनों के माध्यम से ऑक्सीजन की ढुलाई लंबी दूरियों पर सड़क परिवहन की तुलना में तेज है। ट्रेनें एक दिन में 24 घंटे तक चल सकती हैं, लेकिन ट्रक के चालकों को आराम आदि की जरूरत होती है।

यह खुशी की बात हो सकती है कि टैंकरों की लोडिंग/ अनलोडिंग को आसान बनाने के लिए एक रैम्प की जरूरत होती है। कुछ स्थानों पर रोड ओवर ब्रिज्स (आरओबी) और ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की ऊंचाई की सीमाओं के कारण, रोड टैंकर का 3320 मिमी ऊंचाई वाला टी 1618 मॉडल 1290 मिमी ऊंचे फ्लैट वैगनों पर रखे जाने के लिए व्यवहार्य पाया गया था। रेलवे ने बीते साल लॉकडाउन के दौरान भी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई की और आपूर्ति श्रृंखला को बना रखा तथा आपात स्थिति में राष्ट्र की सेवा जारी रखी।



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