गुजरात में दारू बंदी पे आक्षेप करने वाले गहलोत, बोले- हठधर्मिता छोड़ जनभावनाओं को समझे सरकार

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में रविवार को 7 दल और सिविल सोसायटी द्वारा रविवार अल्बर्ट हॉल से गांधी सर्किल तक शांति मार्च निकाला गया। इसके जरिये संदेश दिया कि देश संविधान की मूलभावना के आधार पर चलना चाहिए। गहलोत ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को विभाजनकारी फैसला बताते हुए केंद्र से इसे वापस लेने की मांग की।

दूसरी ओर माहौल खराब होने की आशंका को देखते हुए पुलिस की ओर से जयपुर शहर में इंटरनेट सेवा रात आठ बजे तक के लिए बंद कर दी गई। मेट्रो को दोपहर दो बजे तक बंद रखा गया। शाम चार बजे तक बसें भी नहीं चलेंगी। सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं। पुलिस के जत्थे हर जगह तैनात है।

शांति मार्च से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बोले
शांति मार्च से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बोले कि केंद्र सरकार को जनभावनाओं को समझाना चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह कह रहे हैं कि मैं नागरिकता कानून को हर हाल में देशभर में लागू करवा कर रहूंगा। इतना हिंसा के बाद भी अभी भी धमकाने वाले बयान आ रहे हैं। अपने स्वार्थ के लिए संविधान का गला घोटना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि जामिया मिलिया से शुरू होकर देशभर में आंदोलन छा गया। इसमें सभी धर्मों के लोग प्रभावित होंगे। हिंसा की खबरें सिर्फ भाजपा शासित राज्यों से ही क्यों आ रही है।

गहलोत का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जिस रूप में सीएए को लागू करने की घोषणा की गई है, उससे अनावश्यक रूप से सामाजिक सौहार्द बिगड़ गया है। देश में वर्तमान में बने हालातों के मद्देनज़र संविधान और लोकतंत्र की रक्षार्थ सर्वदलीय एवं सर्वसमाज की ओर से शांति मार्च निकाला जाएगा। मार्च में सीएम अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अलावा सीपीआई से तारासिंह सिद्धू, डीके छंगाणी, नरेन्द्र आचार्य, सीपीएम से वासुदेव, बलवान पूनिया, जनता दल यूनाइटेड से शरद यादव, जनता दल सेक्युलर से अर्जुन देथा शामिल रहे।

सोर्स: पार्ट


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