दूसरे चरण का मतदान समाप्त, महागठबंधन और मजबूत, BJP और CM रघुवर की सेहत ठीक नहीं?

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लीजिये, धीरे-धीरे दूसरे चरण का मतदान भी समाप्त हो गया। राजनीतिक पंडितों का समूह जोड़-घटाव कर अपना विश्लेषण करने में लग गया। रिपोर्ट बता रही है कि आज जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों में वोट पड़े, उन सारे क्षेत्रों में जमकर वोटों का बिखराव हुआ और इसमें सर्वाधिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा हैं, जो भाजपा के जन्मजात वोटर थे, वे अपने घरों में रहकर समय बिताना ज्यादा जरुरी समझा, जबकि अन्य पार्टियों के समर्थकों ने इसका जमकर लाभ उठाया, और अपने विरोधियों को खुब शिकस्त दी।

जमशेदपुर पूर्व की सभी सीटों पर सरयू राय के समर्थक हावी दिखे, हालांकि भाजपा के भी कार्यकर्ता उन इलाकों में डटे हुए थे, पर जो चेहरे पर उत्साह सरयू राय के समर्थकों/कार्यकर्ताओं में दिख रही थी, वो जोश-उत्साह भाजपा के कार्यकर्ताओं में न के बराबर था, जो बता रहा था, कि उन्हें भी आभास हो रहा है कि मतपेटी में क्या जा रहा है, लेकिन वे कर ही क्या सकते थे। आज पूरे जमशेदपुर पूर्व व पश्चिम में सन्नाटा रहा, ज्यादातर लोगों ने मतदान में दिलचस्पी नहीं ली, लेकिन जिन्होंने मतदान में दिलचस्पी ली, उनका कहना था कि वे राज्य में परिवर्तन चाहते हैं, अब आप ज्यादा राजनीति में दिलचस्पी लेते हैं, तो समझिये कि परिवर्तन का मतलब क्या होता है ?

आज 20 सीटों पर संपन्न हुए मतदान में कोई भाजपा का नेता या मंत्री दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि वह चुनाव जीत रहा है क्योंकि हर सीटों पर कांटे का संघर्ष है, अगर कोई जीतेगा भी तो पांच हजार वोटों से या हारेगा भी तो लगभग पांच हजार के वोटों के अंतर से, जो पहले 70 हजार या उससे कम का जो लोग रिकार्ड बनाये हुए हैं, उनको जनता ने इस बार वोट का ऐसा चोट किया है कि वे इस चुनाव को आनेवाले समय तक याद रखेंगे।

सिसई में तो एक मतदान केन्द्र पर हुई झड़प बताता है कि किस प्रकार जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए वहां अडिग थी और किस प्रकार अर्द्ध सैनिक बलों के एक जवान से उसकी भिड़न्त हुई, मतदान केन्द्र पर मृत उक्त व्यक्ति की मौत यह बताने के लिए काफी है कि जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए आज भी किसी से भी लड़ने को तैयार है, लेकिन अफसोस की उस मतदाता की जान ही चली गई।

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता हेमन्त सोरेन ने सिसई में घटी इस घटना की कड़ी निन्दा की है, साथ ही झामुमो ने इस मुद्दे को निर्वाचन आयोग के समक्ष उठा दिया है। ज्ञातव्य है कि सिसई से भाजपा के उम्मीदवार के रुप में स्पीकर दिनेश उरांव चुनाव लड़ रहे हैं, जहां इनकी जीत पर खतरा मंडरा रहा है। आज के मतदान ने राज्य के उन सारे भाजपाइयों के हाथ पांव फूला दिये है, जो यह मानकर चल रहे थे कि प्रथम चरण में मिले झटके से इस दूसरे में उबर जायेंगे, लेकिन जनता ने दूसरे चरण में भी जोर का झटका लगा दिया है। जो भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है।

यही हाल चक्रधरपुर से चुनाव लड़ रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा और चाईबासा से चुनाव लड़ रहे जेबी तुबिद का है। राजनीतिक पंडित बता रहे है कि आज जिन 20 विधानसभा सीटों पर जो चुनाव संपन्न हुए, उनमें से 17 सीटे, जिसमें 16 सीट अनुसूचित जनजातियों तथा एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, जो बता रहा है कि इस बार इन क्षेत्रों में भाजपा के पसीने छूट रहे हैं, यानी पहली बार महागठबंधन ने भाजपा को हर सीट पर अच्छी टक्कर दी है, जो बता रहा है कि लोग इस बार परिवर्तन को ही प्रमुख मुद्दा मान लिया है।

आज जिन 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए, उन सीटों पर ज्यादातर मतदाताओं ने स्वीकार किया कि उनके राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के बोल-चाल, व्यवहार और शब्द बेहद आपत्तिजनक होते हैं, जो ग्राह्य नहीं है, अगर उन्होंने अपने बोल-चाल, व्यवहार और शब्दों पर ध्यान नहीं दिया तो अभी तो जनता ही बिदकी है, आनेवाले समय में जो बचे-खुचे कार्यकर्ता हैं, वे भी उनको देखकर भाग खड़े होंगे, फिलहाल जनता की यही राय है, समझनेवाले समझे, जिन्हें नहीं समझना है, वे सीएम रघुवर का नाम जपते रहे।

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