जेएनयू : ने हॉस्टल फीस बढ़ाने का फैसला आंशिक तौर पर वापस लिया

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छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के आगे झुकते हुए दिल्ली के जवाबर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासन ने हॉस्टल के फीस में की हई बेतहाशा बढ़ोतरी को आंशिक तैौर पर वापस ले लिया.

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने हॉस्टल की फीस बढ़ाने के फैसले को आशंकि तौर पर वापस ले लिया है. विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम को छात्रों और अध्यापकों ने लीपापोती और भ्रामक बताया है. 

केंद्रीय मानव संशाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला  जेएनयू की कार्यकारी परिषद की बैठक में लिया गया.यह बैठक छात्रों के आंदोलन को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में न होकर उससे बाहर आयोजित की गई थी. 

केंद्रीय शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम ने जेएनयू कार्यकारी परिषद के फैसले की जानकारी ट्वीट करके दी. उन्होंने लिखा, ”कार्यकारी समिति ने हॉस्टल फी और अन्य व्यवस्थाओं को वापस लेने का फैसला किया है. इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आर्थिक सहायता के लिए एक योजना प्रस्तावित की गई है. यह अब कक्षाओं में वापस जाने का समय है.”   

जेएनयू के छात्र पिछले 16 दिन से फीस बढ़ोतरी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. सोमवार को उन्होंने दिल्ली में बहुत बड़ा प्रदर्शन किया था. इसमें उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई थी. 

सूत्रों के मुताबिक हॉस्टल के एक बेड वाले वाले कमरे का किराया जिसे बढ़ाकर 600 रुपये करने का प्रस्ताव था, उसे 200 रुपये कर दिया गया है. पहले यह केवल 20 रुपये था.  

वहीं डबल बेड वाले कमरे का किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये करने का प्रस्ताव था, उसे अब बदल कर 100 रुपये कर दिया गया है. 

जेएनयू टीचर एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने कहा, ” पूरी जानकारी मिलने के बाद हम एक बयान जारी करेंगे. अगर खबरें सही हैं तो कोई कमी नहीं हुई है. यह केवल लीपापोती हैं.”

इस प्रतिनिधि ने कार्यकारी समिति की बैठक की वैधता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बैठक में इसके आठ सदस्य मौजूद नहीं थे, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें बैठक की जगह बदलने की सूचना नहीं दी गई. 

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन करते जेएनयू के छात्र.

वहीं जेएनयू छात्र संघ ने कहा कि जबतक हॉस्टल मैन्यूल पर उनसे चर्चा नहीं की जाती उनका आंदोलन जारी रहेगा. 

जेएनयूएसयू की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ” जेएनयू समुदाया की इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है. कार्यकारी समिति की बैठक बिना किसी सलाह-मशविरे के हुई. अगर इसमें आईएचए मैन्युल को बिना किसी चर्चा के पास किया गया है, जिसमें कर्फ्यू टाइमिंग, और व्यस्क छात्रों के बाहर जाने के लिए इजाजत लेने और ड्रेस को लागू करने की बात है तो हम उसे अस्वीकार करते हैं.”

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