आदिवासी डॉक्टर ने सुसाइड कर लिया, तीन डॉक्टरों पर आरक्षण का ताना देने का आरोप

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पायल तड़वी. मुंबई के BYL नायर अस्पताल की 26 बरस की गायनेकलॉजिस्ट, जिसने 22 मई को हॉस्टल के अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. कथित तौर पर अपने तीन सीनियर डॉक्टरों के हाथों हो रहे हरेसमेंट और जातिगत टिप्पणियों से तंग आकर. वो उसे आरक्षण सिस्टम का ताना देते थे. उसकी हंसी उड़ाते थे. नीचा दिखाते थे. उसके परिवार का आरोप है कि पायल चूंकि अनुसूचित जनजाति की थी, आदिवासी थी, इसीलिए उसके सीनियर्स उसे निशाना बना रहे थे. परिवार का कहना है कि 10 मई को उन्होंने पायल के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की शिकायत अस्पताल प्रशासन से की थी. मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. पायल के परिवार ने DNA अखबार से बात की. उनके भाई रितेश तड़वी ने बताया-

हमारे लिए तो सब कुछ रुक गया है. हमारी ज़िंदगी भी ठहर गई है. हम न्याय मांग रहे हैं. हमने डीन से मिलने की बहुत कोशिश की, मगर वो मिले नहीं. मैं विकलांग हूं. मेरी मां कैंसर की मरीज़ हैं. पायल हमारा इकलौता सहारा थी. हमारी इकलौती उम्मीद थी वो. मेरी बहन को तीन महिला डॉक्टरों ने परेशान किया. हमने उनके निलंबन की मांग की है. हम चाहते हैं कि उनका मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी तत्काल रद्द किया जाए.

तीनों आरोपी डॉक्टर्स फरार हैं
पायल को हरैस करने वाली तीनों आरोपी डॉक्टर्स फिलहाल फरार हैं. पुलिस उनके खिलाफ केस दर्ज़ कर चुकी है. FIR के मुताबिक, तीनों सीनियर डॉक्टर पायल को धमकाती थीं. कहती थीं, उसे ऑपरेशन थिएटर में नहीं घुसने देंगी. डिलिवरी नहीं करने देंगी. आदिवासी होने की वजह से उसका मजाक उड़ाती थीं. पायल के पति डॉक्टर सलमान ने भी इस सब बारे में उसके डिपार्टमेंट में शिकायत की थी. उनका कहना है कि कंप्लेंट के बाद पायल की यूनिट बदल दी गई. मगर फिर कुछ समय बाद वापस उसे पुराने यूनिट में ही ट्रांसफर कर दिया गया. वहां फिर से उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया.

पायल की मां की लिखी चिट्ठी सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है
पायल की आत्महत्या पर सोशल मीडिया में काफी कुछ लिखा जा रहा है. पायल के परिवार की वो चिट्ठी, जिसमें उन्होंने तीन सीनियर डॉक्टरों- हेमा आहूजा, भक्ति मेहारे और अंकिता खंडेलवाल पर पायल को तंग करके आत्महत्या के लिए उकसाने का इल्ज़ाम लगाया था, काफी शेयर हो रहा है. इस चिट्ठी के मुताबिक, पायल की मां अपने कैंसर के इलाज के लिए कई बार उसी अस्पताल गईं, जहां उनकी बेटी काम करती थी. एक बार वो OPD में पायल से मिलने गईं. वहां उन्होंने देखा, पायल की रैगिंग हो रही है. वो इस बात की शिकायत डीन से करना चाहती थीं. सोशल मीडिया पर ये चिट्ठी वायरल होने के बाद सरकार ने भी सख्ती दिखाई है. राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में रैंगिग से जुड़े मामलों में नए नियम बनाने और सज़ा तय करने के लिए एक कमिटी बनाने का फैसला किया है.

डीन का क्या कहना है?
डीन आर एन भरमाल का कहना है कि उन्हें पायल के परिवार की तरफ से इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली. उनके मुताबिक-

हमारे पास शिकायत दर्ज़ करने के लिए कई फोरम्स हैं. ऐंटी-रैगिंग यूनिट भी है. मैं खुद भी हमेशा उपलब्ध रहता हूं. मुझे दुख है कि पायल ने कहीं भी शिकायत नहीं की. किसी से संपर्क नहीं किया. न ही संबंधित विभागों के प्रमुख ने निजी तौर पर मुझे कोई जानकारी दी. अगर मुझे इस बारे में कुछ भी पता होता या पायल और उसके परिवार ने शिकायत की होती, तो जो हुआ वो नहीं होता. हम जांच करवा रहे हैं.

पायल का परिवार जलगांव जिले का रहने वाला है. रितेश का कहना है-

हमारे समुदाय को पायल पर बहुत नाज़ था. हमारे इलाके से पहली थी वो, जिसने डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की. वो अब MD कर रही थी. अब हमारे सारे सपने चकनाचूर हो चुके हैं.

अब चाहे जो भी कार्रवाई हो, पायल लौटकर नहीं आने वाली. उसके परिवार को वो कभी दोबारा नहीं मिलेगी. पायल के फेसबुक पेज पर आखिरी अपडेट 13 मई, 2018 का है. इसके एक दिन पहले उसने BYL नायर अस्पताल जॉइन किया था. बतौर रेजिडेंट डॉक्टर. कितनी खुश रही होगी वो उस दिन. वहां फेसबुक के अपने उस पेज पर वो अब भी ज़िंदा है. अगर तीनों आरोपी डॉक्टरों पर लगाए जा रहे इल्ज़ाम सही हैं, तो सोचिए. साइंस पढ़ने वाली, पढ़ी-लिखी डॉक्टर्स ऐसा कर सकती हैं तो आप किसी और से क्या उम्मीद कर सकते हैं? आरक्षण का मूल, उसका न्याय समझे बिना उसके खिलाफ ज़हर पालने वाले लोग तो आपके इर्द-गिर्द भी कई होंगे.


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