असम की ज़िंदगी पर बाढ़ की मार

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राज्य के 28 ज़िलों में करीब 26 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित है. पिछले पांच दिनों में बारिश और भूस्खलन से राज्य में 12 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

असम में भारी बारिश ने कहर बरपाया हुआ है. बारिश की वजह से ब्रह्मपुत्र समेत राज्य की कई नदियों में पानी खतरे के निशान को पार कर गया है. राज्य के 28 ज़िलों में करीब 26 लाख लोग बाढ़ से पीड़ित है. पिछले पांच दिनों में बारिश और भूस्खलन से राज्य में 12 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बाढ़ से लगभग 90 हज़ार हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है. आम लोगों के साथ पशु और काजीरंगा नेशनल पार्क में एक सींग वाले गैंडे भी बाढ़ की चपेट में है.

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव का काम कर रही है. कई जगहों पर सेना की मदद भी ली जा रही है.

हर तरफ़ पानी, लेकिन प्यास के लिए इस खुले कुएं का सहारा. कामरूप ज़िले के राजबारी गांब में प्यास बुझाने के लिए पानी निकालती महिला.

बाढ़ के चलते उजड़े घर की दहलीज़ पर पानी को निहार रहीं महिला. आधा घर बर्बाद हो चुका है. दुआ यही है कि पानी उतरे और घर-बार को फिर से वो खड़ा कर सके.

गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी उफान पर है. सरकारी अमले की तरफ़ से राहत-बचाव कितना होगा, ये लोगों को मालूम है. लोग जीवट हैं, उन्हें आदत पड़ चुकी है. पानी के बीचो-बीच उतरकर ख़ुद से बांस का पुल बनाने में लोग जुट गए हैं.

घर बह गया, खेत डूब गए. सड़कों पर नाव चल रही है. लोगों ने उन जगहों पर पनाह ले रखी है जहां पानी कम है. लेकिन, खाने के लिए अनाज तो चाहिए. गुवाहाटी में नाव पर अनाज की बोरियां लादकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे लोग.

मोरेगांव ज़िले में पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाते लोग.

नदियों का कटाव इतना भयावह है कि दस-दस फुट ज़मीन धंसकर सीधे नदियों में समा जा रही है. कामरूप गांव में बह गई ज़मीन का मलबा देख रहे लोग.

ग़रीबों की मुश्किलें अपार होती हैं. घर में सिर्फ़ सामान नहीं होते, ज़िंदा मवेशी होते हैं, ज़िंदा बकरियां होती हैं. यही उनकी संपत्ति है. यही उनकी पूंजी है. काजीरंगा के हरमोती गांव की इस तस्वीर में ये साफ़ दिख भी रहा है. नाव पर दो लोग हैं और तीन बकरियां.

हर बार की कहानी है. इनके लिए घर भी अस्थाई पते की तरह है. बारिश हुई नहीं कि घर छोड़ने की तैयारी शुरू हो जाती है. काज़ीरंगा नेशनल पार्क पार कर कहीं सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ रहे हरमोती गांव के लोग.

चारों तरफ़ पानी. ना सड़क, ना नाव. यही इनका फर्श है, यही घर और यही गाड़ी बर्तन भी यही धुल रहे हैं और इसी पर बैठकर आस-पास का जायज़ा भी ले रहे हैं. बाढ़ के पानी से घिरने के बाद ज़िंदगी की तलाश में जुटा मोरेगांव का एक परिवार.

अब पानी हैंडपंप के मुंह तक पहुंच गया है. हैंडपंप के नीचे भी पानी, ऊपर भी पानी. कामरूप ज़िले में पीने के लिए हैंडपंप से पानी निकाल रही महिलाएं.

वन्यजीवों से भरपूर असम के इस इलाक़े में लोगों के साथ-साथ हर बार इन जानवरों को भी इसकी विभीषिका झेलनी पड़ती है. मोरेगांव के पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य में एक सींग वाला अनूठा गैंडा बाढ़ के पानी में तैरकर सतह पर पहुंचने की कोशिश में जुटा है.


बांस ही लाठी, बांस ही रास्ता. ये ना तो पुल है और ना ही पगडंडी. मोरेगांव ज़िले में बांस पर चलकर पानी को लांघ रही बुज़ुर्ग महिला.


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