संभावित विस्थापन के खिलाफ मानव श्रृखंला बनाकर किया विरोध प्रदर्शन

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जेएनएन, गुमला : गुमला जिला के विभिन्न स्थानों पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने केन्द्रीय जन संघर्ष समिति के आह्ववान पर सोमवार को संभावित विस्थापन के खिलाफ जगह-जगह मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। गुमला शहर के डुंबरटोली मोड़ के पास सैकड़ों लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर मानव श्रृंखला बनाया। जल जमीन और जंगल के समर्थन में नारे लगाए। सुनील केरकेट्टा, रोज खाखा, आशुतोष राहुल तिग्गा, पलादियुस तिर्की, अजित कुजूर आदि ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन को लूटना चाहती है। इसलिए ग्राम सभा की शक्ति को खत्म कर सुप्रीम कोर्ट की आड़ में काम कर रही है। उनके पूर्वजों में कड़ी मेहनत से जमीन और जंगल को संवारा और बचाया है। उसकी रक्षा करने का सभी लोग संकल्प लेते हैं।

इधर केन्द्रीय जन संघर्ष समिति गुमला और लातेहार के केन्द्रीय सचिव जेरोम जेराल्ड कुजूर ने बताया कि नेतरहाट फिल्ड फायरिग रेंज, पलामू टायगर परियोजना, वाइल्ड लाइफ कोरीडोर के प्रभावित इलाकों में गुमला के टोंगो चैनपुर जारी डुमरी रजावल बिशुनपुर लातेहार के महुआटांड़, बोहटा, पकरी पाट, विजयपुर, पंडरा में लोग सड़क पर उतरे और मानव श्रृंखला बनाकर विस्थापन का विरोध किया। उन्होंने बताया कि वनाधिकार कानून 2006 को सख्ती से लागू करने की मांग की गई। सोनभद्र नरसंहार का विरोध किया गया। वन कानून 1927 में हुए संशोधन का विरोध करते हुए जल जमीन और जंगल की रक्षा करते हुए मानव श्रृंखला बनाया गया। जुलूस निकाला गया। वन्य जीव संरक्षण के नाम पर उच्च्तम न्यायालय ने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों को अतिक्रमणकारी करार दिया था और 27 जुलाई तक हटाने का आदेश दिया था। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश पर रोक लगा दी है। यदि 24 जुलाई को होने वाली सुनवाई में आदेश हटाया गया तो देश के 23 लाख से अधिक आदिवासी विस्थापित होंगे। बिशुनपुर में भी अनिल असुर के नेतृत्व में मानव श्रृंखला बनाया गया। डीपू मैदान से प्रखंड मुख्यालय तक बनाए गए मानव श्रृंखला में शामिल लोग शांति पूर्वक अपनी मांग रखे। अनिल असुर ने राष्ट्रपति से आदिवासियों को बेदखल नहीं करने की अपील की है। इस कार्यक्रम में अल्फोंस बलराम उरांव, देवकृता मिज, विनोद मिज, दीपक उरांव, प्रेमचंद उरांव आदि शामिल थे।


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