रॉबर्ट वाड्रा क्या भाजपा के खिलाफ प्रियंका गांधी का सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं?

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रॉबर्ट वाड्रा के मसले पर प्रियंका गांधी अब जो रुख दिखा रही हैं उससे लगता है कि अपने पति पर लग रहे आरोपों पर वे आक्रामक राजनीति करने वाली हैं

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के कई नेता अक्सर अपनी चुनावी सभाओं में रॉबर्ट वाड्रा का मसला भी उठाते थे. ये लोग तब यह कहते हुए नहीं थकते थे कि गांधी परिवार के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को मनमोहन सिंह की केंद्र सरकार और हरियाणा की भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने गैरकानूनी ढंग से आर्थिक लाभ पहुंचाया है. उस वक्त भाजपा की ओर से लगातार यह कहा जाता था कि केंद्र में अगर उनकी सरकार आई तो रॉबर्ट वाड्रा सलाखों के पीछे होंगे.

केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की सरकार आने के बाद भी रॉबर्ट वाड्रा का मुद्दा भाजपा ने लगातार उठाया. जब भी प्रियंका गांधी के राजनीति में सक्रिय होने की चर्चा चली, भाजपा नेता रॉबर्ट वाड्रा के बारे में बात करने लगे. बार-बार यह कहा गया कि वाड्रा के खिलाफ केंद्र की एजेंसियां जांच कर रही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कभी भी की जा सकती है. लेकिन मोदी सरकार के साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी इस मामले में कुछ खास प्रगति होती नहीं दिखी.

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा ने जान-बूझकर बेहद रणनीतिक ढंग से रॉबर्ट वाड्रा का मसला बार-बार इसलिए उठाया ताकि उनकी पत्नी प्रियंका गांधी के मन में यह डर बैठा रहे कि अगर वे सियासत में आती हैं तो उनके पति पर कार्रवाई की जा सकती है. भाजपा अपनी इस योजना में एक हद तक कामयाब भी रही. जब 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस विधानसभा चुनावों में भी लगातार हारी तब कांग्रेस के अंदर प्रियंका गांधी को लाने की बात बार-बार उठी. लेकिन बात इससे कभी आगे नहीं बढ़ सकी.

अब जब प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी के तौर पर राजनीति में सक्रिय हो गई हैं तो फिर से भाजपा की ओर से रॉबर्ट वाड्रा का मसला उठाया जा रहा है. जिन मामलों में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन मामलों में रॉबर्ट वाड्रा को केंद्र सरकार की एजेंसियां लगातार लंबी पूछताछ के लिए बुला रही हैं. अगले लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा जो राजनीतिक सभाएं कर रही है, उनमें मंच से रॉबर्ट वाड्रा का नाम लेकर प्रियंका गांधी को घेरने की कोशिश हो रही है.

लेकिन इस पर प्रियंका गांधी ने अब तक जो रुख दिखाया है, उससे यही लगता है कि अपने पति पर लग रहे आरोपों पर रक्षात्मक होने के बजाए वे आक्रामक राजनीति करने वाली हैं. जिस दिन रॉबर्ट वाड्रा को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए बुलाया, उसी दिन प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव के पद का कार्यभार भी संभालना था. उस दिन प्रियंका घर से रॉबर्ट वाड्रा के साथ निकलीं और उन्हें प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय में छोड़ने के बाद कांग्रेस मुख्यालय पहुंच गईं. जब रॉबर्ट वाड्रा को प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ के लिए जयपुर बुलाया तो अपना उत्तर प्रदेश दौरा बीच में छोड़कर प्रियंका गांधी भी वहां पहुंच गईं.

इसके बाद प्रियंका गांधी कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी रॉबर्ट वाड्रा के साथ दिखीं. हालांकि कुछ समय पहले तक वे ऐसा न के बराबर ही किया करती थीं. इसका फायदा उठाकर भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पर लगातार यह कहते रहे कि प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के आपसी संबंध सहज नहीं हैं. लेकिन सक्रिय राजनीति में कूदने के बाद से रॉबर्ट वाड्रा के साथ लगातार दिखकर प्रियंका यह संकेत दे रही हैं कि ये बातें बेबुनियाद हैं और वे और पूरा गांधी परिवार पूरी मजबूती से रॉबर्ट वाड्रा के साथ खड़ा है.

साफ है कि वाड्रा से होने वाली पूछताछ या उनके खिलाफ होने वाली हर कार्रवाई को कांग्रेस राजनीतिक प्रतिशोध के लिए की जाने वाली कार्रवाई के तौर पर पेश करने वाली है. प्रियंका गांधी इस दिशा में बयान भी देने लगी हैं. उन्होंने कहा है कि उनके पति के खिलाफ मोदी सरकार बदले की भावना से प्रेरित होकर कर रही है.

आने वाले दिनों में प्रियंका गांधी चुनावी सभाओं में यह बात बोल सकती हैं कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा को जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि उन्हें राजनीति में आने से रोका जा सके. प्रियंका गांधी वैसे भी भावनात्मक स्तर पर किसी मुद्दे को उठाने में माहिर हैं. कभी गांधी परिवार के विश्वस्त रहे अरुण नेहरू की रायबरेली में जमानत जब्त कराने का काम प्रियंका गांधी ने भावनात्मक अपील के जरिए ही किया था.

और अगर केंद्रीय एजेंसिया रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कुछ नहीं करती हैं तो प्रियंका गांधी ‘पीड़ित’ कार्ड खेलते हुए यह कह सकती हैं कि अगर वाकई उनके पति ने कोई गलती की है तो उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. अगर केंद्र और हरियाणा में भाजपा की सरकार होते हुए भी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है तो इसका मतलब वे निर्दोष हैं.

यानी कि इस समय मोदी सरकार के सामने ऐसी स्थिति है कि अगर वह रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कुछ करती है तो उसका प्रियंका गांधी औऱ कांग्रेस फायदा उठा सकते हैं. और अगर वह वाड्रा के खिलाफ कुछ नहीं करती है तो इससे भाजपा का नुकसान हो सकता है.


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