छत्तीसगढ़ से आदिवासियों के विस्थापन पर विचार करेगा अनुसूचित जनजाति आयोग

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नई दिल्ली, प्रेट्र। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) नक्सली हिंसा के कारण छत्तीसगढ़ से आदिवासियों के कथित विस्थापन के मुद्दे पर विचार करने के लिए बैठक करेगा। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय और आदिवासी मामलों का मंत्रालय शामिल होगा। एनसीएसटी के संयुक्त सचिव एसके राठौड़ ने कहा कि जून के आखिर या अगले महीने के शुरू में होने वाली बैठक में केंद्रीय मंत्रालयों के अलावा छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा।

संयुक्त सचिव ने कहा, ‘हमने आयोग की चार जून को हुई 115वीं बैठक में मामले पर चर्चा की। दावा है कि हिंसा के कारण छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में लोग आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र चले गए हैं।’

राठौड़ ने कहा कि आयोग के कुछ सदस्यों का कहना है कि हिंसा के कारण कश्मीरी पंडित जम्मू एवं कश्मीर से पलायन कर गए। नक्सली हिंसा के कारण कुछ ऐसा ही छत्तीसगढ़ में हुआ है और वे चार राज्यों से बुनियादी रिपोर्ट चाहते हैं। इसीलिए इन राज्यों को फीडबैक के लिए बुलाया गया है।

हम तय करना चाहते हैं कि यह सही है या नहीं। यदि सही है तो कितने लोग वहां बसे हैं और उसके बाद हम गृह और आदिवासी मामलों के मंत्रालय के साथ इसे उठाएंगे।

करीब 30 हजार लोग कर गए हैं पलायन

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि छत्तीसगढ़ से नक्सली हिंसा के कारण करीब 30,000 लोग पलायन कर गए हैं। वे ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के वन क्षत्र में 248 बस्तियों में रह रहे हैं। ये आदिवासी अत्यंत विषम परिस्थितियों में रह रहे हैं। पेयजल और बिजली की सुविधा से महरूम हैं। उन्हें न्यूनतम मजदूरी मिलती है और उनके पास न तो राशन कार्ड है और न ही वोटर आइडी है। इन राज्यों ने उन्हें आदिवासी की मान्यता भी नहीं दी है। वन भूमि पर उन्हें अधिकार नहीं है और वे सामाजिक सुरक्षा लाभ से वंचित हैं। 

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