Statue of Unity ने Taj Mahal को कमाई में पीछे छोड़ा, पर यहां एक ट्विस्ट है

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स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी. 31 अक्टूबर, 2018 को पीएम मोदी ने उद्घाटन किया. यह गुजरात में वडोदरा से 90 किलोमीटर की दूरी पर है. सरदार सरोवर बांध के पास इस जगह का नाम है साधु बेट द्वीप. ये मूर्ति नर्मदा नदी के बीच बनी हुई है.

इसके बारे में इसलिए बता रहे हैं क्योंकि इस स्टैच्यू की कमाई ने ताजमहल को पीछ छोड़ दिया है. जहां ताजमहल ने 56 करोड़ रुपए ही कमाए हैं, वहीं स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने 71 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने देश के6 स्मारकों पर सर्वे किया था. इसके बाद इस कमाई के बारे में पता चला.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की वेबसाइट के मुताबिक, अडल्ट यानी वयस्कों की एंट्री के लिए 120 रुपये की टिकट है. और 3 से 15 साल के बच्चों के लिए 60 रुपये की टिकट है. और अगर आपको वहां पर म्यूजियम देखना है, फोटो गैलरी देखनी है, सरदार सरोवर धाम देखना है, तो उसके लिए 3 से 15 साल के बच्चों के लिए 200 रुपये और बड़ों के लिए 350 रुपये का टिकट है. वहीं, एक्सप्रेस एंट्री के लिए टिकट 1000 रुपए है.

उधर, ताजमहल की एंट्री फीस सभी के लिए 50 रुपए है. पर विदेशी पर्यटकों के लिए 1100 रुपये और सार्क और बिम्सटेक के लिए 540 रुपये की टिकट है. तो देखा जाए, तो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की एंट्री फीस की वजह से उसकी कमाई ज्यादा है. लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर रहे हैं. जबकि दोनों के पर्यटकों की संख्या जानकर चौंक जाएंगे. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पर्यटकों की संख्या 26 लाख से ज्यादा है, जिसका जिक्र खुद पीएम मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में किया था. और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजमहल के पर्यटकों की संख्या करीब 64 लाख है.

वहीं, इंडिया टुडे कि रिपोर्टर गोपी मनियार ने बताया कि स्टैच्यू ऑफ युनिटी को पिछले एक साल में 27.95 लाख लोगों देखा औऱ  75 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है.

ये मूर्ति इस दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है. इसकी ऊंचाई है 182 मीटर. एक रेफरेंस के लिए बता दूं कि स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी 93 मीटर की है. यानी सरदार पटेल अमरीका की सबसे फ़ेमस मूर्ति की दोगुनी ऊंचाई पर खड़े होंगे. इस प्रोजेक्ट में रक़म खर्च हुई है 2 हज़ार 9 सौ करोड़ रुपये. समय लगा 42 महीने. ये प्रोजेक्ट मई 2015 में शुरू हुआ था. इस मूर्ति को डिज़ाइन किया है राम वी सुतार ने. सुतार एक मूर्तिकार हैं जिन्हें पद्मभूषण सम्मान भी मिला है. डिज़ाइन को रूप देने के लिए चीन के एक ढलाईघर जियांग्जी टोकिन कंपनी की मदद ली गई.

तो कैच ये कि लोग ज़्यादा तो ताजमहल में आए हैं, लेकिन कमाई स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ज़्यादा हुई. क्यूंकि उसे देखने का खर्चा ज़्यादा है. कहीं ज़्यादा है.


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