3 साल बाद: हाय हाय नोटबंदी, नोट हुए महंगे, बढ़ा ख़र्चा

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5 नवंबर को जारी की गई मुख्य सचिव के नोट में कहा गया है कि अगर किसी भी कर्मचारी को इस बोर्ड द्वारा जारी की गई मार्कशीट या प्रमाणपत्र के आधार पर हरियाणा में नियुक्ति दी गई है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है और इसके अलावा अन्य उपयुक्त कार्रवाई भी की जा सकती है.

सूत्रों के मुताबिक़ देश भर की राज्य सरकारें भी सीबीआई द्वारा पिछले महीने अलर्ट जारी करने के बाद जांच की तैयारी में जुट गईं हैं. सीबीआई ने इस बात से आगाह किया था कि कई राज्यों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य भारत, ग्वालियर द्वारा आयोजित परीक्षाओं को 10वीं और 12वीं के बराबर माना है और सरकारी / निजी संगठनों में नियुक्ति और उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है.

हरियाणा सरकार राज्य भर के सभी सरकारी कर्मचारियों और कॉलेज के छात्रों की कक्षा 10 और 12 की मार्कशीट और अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करेगी. ये फ़ैसला सरकर ने सीबीआई द्वारा फर्जी मार्कशीट घोटाले का खुलासा करने के बाद लिया है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई निदेशक को पिछले साल इस बोर्ड के बारे में जांच करने के लिए कहा गया था. जिसके बाद यह मामला सामने आया है.

पिछले महीने सीबीआई द्वारा हरियाणा सरकार को एक चिट्ठी भेजी है. इस चिट्ठी के आधार पर हरियाणा के मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने अब सभी प्रशासनिक सचिवों, अंबाला, हिसार, गुड़गांव, करनाल, फरीदाबाद,रोहतक डिवीजनों के कमिश्नरों, पंजाब और हरियाणा कोर्ट के कुलसचिव, हरियाणा भर के सभी बोर्डों और निगमों के मुख्य निदेशक और सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को सभी कर्मचारियों और छात्रों की मार्कशीट और प्रमाण पत्रों की जांच करने का आदेश दिया है.

5 नवंबर को जारी की गई मुख्य सचिव के नोट में कहा गया है कि अगर किसी भी कर्मचारी को इस बोर्ड द्वारा जारी की गई मार्कशीट या प्रमाणपत्र के आधार पर हरियाणा में नियुक्ति दी गई है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है और इसके अलावा अन्य उपयुक्त कार्रवाई भी की जा सकती है.

मुख्य सचिव के मुताबिक़ देहरादून में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने दिसंबर में इस बोर्ड के ख़िलाफ़ दो आपराधिक मामले दर्ज़ किए थे. इस बोर्ड ने बिना परीक्षा कराए और केवल रुपए कमाने के लिए बड़ी तादाद में फ़र्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी किए. एजेंसी ने पाया था कि देश भर के कई स्कूल और कॉलेज बोर्ड से जुड़े थे और पिछले महीने सभी राज्य सरकारों को भी इस बात की जानकारी दी थी.

हालांकि ये बोर्ड अपनी वेबसाइट पर दावा करता है कि यह भारत सरकार के योजना आयोग के तहत पंजीकृत है और भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत चलाया जाता है.

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