आदिवासी सावधान : यूपी-उत्तराखंड में जहरीली शराब का कहर, अब तक 82 लोगों की मौत

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रूड़की से कुशीनगर तक पसरा है मातम, सहारनपुर में सबसे ज्यादा 36 की मौत.

अवैध रूप से धधक रहीं शराब की भट्ठियां यूपी और उत्तराखंड में कहर बनकर टूटी हैं. मेरठ, सहारनपुर, रूड़की से लेकर कुशीनगर तक अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है. जिसमें मेरठ में 18, सहारनपुर में 36, रुड़की में 20 और कुशीनगर में 8 लोगों की मौत हुई है. यूपी सरकार के मुताबिक जहरीली शराब से मरने वाले ज्यादातर लोग एक तेरहवीं में शामिल होने उत्तराखंड गए थे. वहीं पर इन सब ने शराब पी. वापस आने के बाद इन लोगों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई. मेरठ में मरने वाले 18 लोग सहारनपुर से इलाज के लिए लाए गए थे. अभी भी कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. मरने वालों में अधिकतर सहारनपुर जिले के नागल, गागलहेड़ी और देवबंद थाना क्षेत्र के गांव के रहने वाले लोग हैं. दर्जन भर गांवों में मातम पसरा हुआ है.

8 फरवरी की रात यूपी के मुख्य सचिव और बाद में डीजीपी ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए निर्देश दिए कि जहरीली शराब के मामले में सभी जिलों में छापेमारी और खोजबीन की जाए. यह अभियान अगले पंद्रह दिनों तक चलेगा. जिसमें धरपकड़ के साथ-साथ अवैध शराब की भट्टियों पर छापेमारी की जाएगी. सरकार की तरफ से साफ निर्देश है कि जिस जिले में लापरवाही होगी, वहां के पुलिस कप्तान और जिलाधिकारी को इसका खामियाजा भुगतना होगा.

अब प्रशासन हुआ ऐक्टिव

सहारनपुर और कुशीनगर मे हुई मौतों के बावजूद जानलेवा शराब की तस्करी का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है. कुशीनगर में पुलिस और आबकारी की संयुक्त टीम ने छापा मारकर कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एनएच 28 पर ढाबे पर खड़ी ट्रक में भूसे में छिपाकर ले जाई जा रही शराब की 1600 पेटियां बरामद की हैं. बरामद अवैध शराब की कीमत लगभग 80 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है. कप्तानगंज पुलिस ने आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है और फिलहाल शराब तस्कर फरार बताया जा रहा है.

प्रशासनिक आदेश के बाद अधिकारी भी एक्शन मोड में आ गए हैं. पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत दर्जनों जिलों मे एक साथ आबकारी और पुलिस की छापेमारी चल रही है. कई जगह से शराब की बरामदगी हुई है तो कई अवैध फैक्ट्रियां सील की गई हैं. लेकिन यही कार्रवाई इसी तत्परता के साथ पहले की गई होती तो इस तरह की नौबत ही न आती. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने के बाद नींद से जागे प्रशासन ने पूरे प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही है. लेकिन गांव-गांव धधक रही भट्ठियों पर इस अभियान का कितना असर होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

8 फरवरी की रात यूपी के मुख्य सचिव और बाद में डीजीपी ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए निर्देश दिए कि जहरीली शराब के मामले में सभी जिलों में छापेमारी और खोजबीन की जाए. यह अभियान अगले पंद्रह दिनों तक चलेगा. जिसमें धरपकड़ के साथ-साथ अवैध शराब की भट्टियों पर छापेमारी की जाएगी. सरकार की तरफ से साफ निर्देश है कि जिस जिले में लापरवाही होगी, वहां के पुलिस कप्तान और जिलाधिकारी को इसका खामियाजा भुगतना होगा.


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