इंडियन आर्मी ने साफ कहा- जो कश्मीर में बंदूक उठाएगा, मारा जाएगा

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लवामा आतंकी हमले के बाद पहली बार इंडियन आर्मी, सीआरपीएफ और जम्मू और कश्मीर पुलिस ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेस की. हमले के 100 घंटे के भीतर दो बड़े एनकाउंटर करके आर्मी ने घाटी में जैश ए मोहम्मद के तीन बड़े सरगनाओं को मार गिराया है. इस आंतकी हमले के सभी लीडर्स पाकिस्तान से कंट्रोल हो रहे थे और इनके कमांडर्स पाकिस्तानी थे. 18 फरवरी को इस हमले के मास्टरमाइंड राशिद गाज़ी को मार डाला है. आर्मी ने कहा कि आगे भी वो इन ऑपरेशन्स को जारी रखेगी.

आर्मी ने अभी तक के सबसे सख्त लहजे में कहा भारत सरकार आतंकियों के आत्मसमर्पण के लिए नई नीति लेकर आई है. जो भी हथियार डालेगा उसे मुख्यधारा में आने का पूरा मौका दिया जाएगा. मगर अब घाटी में जो भी बंदूक उठाएगा, वो मारा जाएगा. आर्मी की तरफ से चिनार कोर के लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा कि मैं कश्मीर में मांओं से ये निवेदन करना चाहता हूं कि अपने बच्चों को दहशतगर्द बनने से रोंके. अगर कोई भी बंदूक उठाएगा तो आर्मी उसे छोड़ेगी नहीं. जो लोग शांति से यहां जीना चाहते हैं उन्हें हथियार डालने ही पड़ेंगे और कोई रास्ता नहीं है. हम लोग एक एक दहशतगर्द को खत्म करेंगे.”

साथ ही आर्मी ने इस सवाल पर कि सेनाओं को भी काफी नुकसान हुआ है, ढिल्लन ने कहा, “हमारी हमेशा कोशिश रहती है कि किसी भी सिविलयन को को नुकसान न हो. 18 फरवरी को हुए ऑपरेशन में पहला सिविलियन आंतकी की गोली से मरा. मगर उसके बाद 17 घंटे तक चले ऑपरेशन में एक सिविलियन नहीं मारा गया.” लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने ये भी कहा कि ब्रिगेडियर हरदीप सिंह हमले के दौरान छुट्टी पर थे. वो अपनी चोट का इलाज करवा रहे थे. मगर जब उन्हें इस ऑपरेशन का पता चला तो वो खुद अपनी छुट्टी से वापिस आ गए और इस ऑपरेशन का हिस्सा बने. उन्होंने अपनी टीम को खुद लीड किया.

वहीं आईजीपी कश्मीर एसपी पानी ने कहा कि घाटी में मिलिटेंट्स की भर्ती की संख्या लगातार कम हुई है. पिछले तीन महीने में एक भी नई भर्ती नहीं देखी गई. इसमें कश्मीरी परिवारों का बड़ा रोल है. परिवार अपने बच्चों को आतंकी बनने से रोक रहे हैं जो कश्मीर के भले में है. साथ ही लोगों को इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ये भी हिदायत दी गई कि आंतकियों के भिड़ंत के दौरान और बाद में घटनास्थल से दूर रहें.

इस सवाल पर कि इतना आरडीएक्स या बारूद पुलवामा हमले में कहां से आया, आर्मी ने कहा कि इस पर अभी जांच चल रही है जिसके नतीजे जल्द ही आ जाएंगे. वहीं इस सवाल पर कि क्या ये खुफिया एजेंसियों की चूक के चलते हुआ, लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने कहा,” हर बार ये होता था कि जब भी फोर्सेज की कोई टुकड़ी एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती है तो आम ट्रैफिक को रोका नहीं जाता है. मगर उस रूट को जरूर माइन्स या और किसी भी खतरे से सुरक्षित किया जाता है. वो इस बार भी हुआ था. मगर आतंकियों ने अपने काम करने का तरीका बदल लिया है और ये दुनिया में हर जगह बदला है. सीरिया से लेकर दूसरी जगहों पर भी ऐसे उदाहरण देखे गए कि अब आत्मघाती हमलों में इस तरह वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. आगे से अब सेना सिविलियन ट्रैफिक को टुकड़ी से दूर रखेगी.”


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