શ્રી છોટુભાઈ વસાવા એમ.એલ.એ – MLA Jhaghadia

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છોટુભાઈ અમરશિહ વસાવા 

Chhotubhai Vasava MLA Jhagadia

આદિવાસી મસીહા

ઉમર: ૬૭ વર્ષ

સરનામું: માંલજીપરા તા.ઝગડિયા જી.ભરૂચ

Party: BTP Bhartiya Tribal Party

जीवन में हम किसी को काम ना आये , वो जीवन किस काम का, जीवन वही है जो हम हर पल किसीना किसी को काम आये, चाहे रास्ता कठिन क्यों ना हो , हमें चलते रहना है, चाहे हमारे लिए नहीं तो किसी और के लिए

जब आदिवासी अपनी पहचान, स्वायत्तता और जमीन, इलाका एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हेतु अपने पारंपरिक संस्थानों को सक्रिय करते हैं तब आरोप लगाया जाता है कि वे भारतीय संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं, सरकार को चुनौती दे रहे हैं और समानंतर सरकार चला रहे हैं। लेकिन जब वहीं काम दूसरे लोग करते हैं तब कोई प्रश्न नहीं उठाया जाता है। उदाहरण के तौर पर ये दो तस्वीर हैं। एक तस्वीर सरकारी विद्यालय का और दूसरी तस्वीर निजी विद्यालय का। जब सरकार शिक्षा व्यवस्था चला रही है तब निजी विद्यालय चलाना क्या समानंतर व्यवस्था चलाना नहीं है? जब सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था चला रही है तब निजी अस्पताल खोलना क्या सरकार को चुनौती देना नहीं है? यह कैसा दोहरा मापदंड है? जब आदिवासी आपने गांव में प्रवेश करते समय किसी से पूछताछ करे तब वह संविधान विरोधी हो जाता है और वहीं काम शहरों में काॅपरेटिव काॅलोनी, अपार्टमेंट, हाउसिंग काॅलोनी वगैरह में हो तब वह संविधान विरोधी नहीं सुरक्षा कहा जाता है? क्यों ?

Chhotubhai Vasava
अपने आदिवासी ◆इतिहास~संस्कृति◆ पर गर्व कीजिए जिसकी वजह से से आज आप जिंदा हैं
●फागुन के महीना में आदिवासी लोग हरियारी/भईहारी पुजा करते हैं और जिसमे हमारे क्षेत्र में मुख्य रूप से फुटकल के पेड़ में पत्तियों की जो नई कोपले/टुसा निकला रहता है उसे पुजा में चढ़ाया जाता है l
◆इस पूजा में परिवार के सभी भाई मिलकर कोड़ी, टांगी, गईता, फार इत्यादि औजारों की पूजा करते हैं इसलिए इसे भईहारी_पुजा भी कहते हैं l
●बसंत ऋतु में पतझड़ के बाद एकमात्र फुटकल के पेड़ में सबसे पहले हरी पत्तियां निकलती है जिसके कोपलो / टुसा को पुजा के रूप में चढ़ाया जाता है उसके बाद उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है, और इसलिए इस पूजा को हरियारी_पुजा भी कहते हैं l
◆फुटकल टूसा, दाहू फूल और जिरहुल फूल प्रमुख रूप से पूजा में चढ़ाया जाता है उसके बाद ही दैनिक रूप से सब्जी के रूप में सुकटी या हरा सब्जी के रूप में खाया जाता है l
◆आज भी यह प्रथा देश के ग्रामीण आदिवासी एरिया मे बरकरार है।

Chhotubhai Vasava


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