4 लाख परिवारों को मोदी सरकार ने ये बड़ा तोहफा दिया है

SHARE WITH LOVE
  • 102
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    102
    Shares

पाई-पाई जोड़कर आदमी घर में लगाता है, 30-30 साल के लिए लोन लेता है, लेकिन छत नसीब नहीं होती. क्योंकि एक के बाद एक हाउसिंग प्रोजेक्ट अटक जाते हैं. खरीददारों ने अपने हिस्से का पैसा दिया, लेकिन घाटा उठा रही कंपनियां घर नहीं दे रहीं. अब इन प्रोजेक्ट्स में घर चाहने वालों के लिए राहत की खबर आई है. 6 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट ने रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में 25 हज़ार करोड़ लगाने का फैसला लिया. ये फैसला क्यों महत्वपूर्ण है और क्या ये आपके लिए फायदे का सौदा बनेगा? यही समझेंगे हम आसान भाषा में.

दिल्ली-एनसीआर के शहरी इलाके में पूरे देश के मुकाबले घरों की सेल सबसे कम हुई है. वहीं पुणे इस रेस में सबसे आगे है.
दिल्ली-एनसीआर के शहरी इलाके में पूरे देश के मुकाबले घरों की सेल सबसे कम हुई है. वहीं पुणे इस रेस में सबसे आगे है.

हाउसिंग प्रोजेक्ट रुके क्यों हुए हैं?

2008 मंदी का साल था. दुनियाभर के बाज़ारों पर असर पड़ा. इसके बाद दुनियाभर में निवेशक रीयल एस्टेट से घबराने लगे. भारत में भी इस सेक्टर के लिए पैसे की आवक कम हो गई. भारत में 2007-2008 के बाद से कमर्शियल और हाउसिंग – दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में भारी कमी आई है. तब से हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लगातार दबाव में रहे हैं. गलती रीयल एस्टेट सेक्टर की भी रही है. भारत में कई बड़े ग्रुप्स ने ग्राहकों से एक प्रोजेक्ट के लिए पैसा लिया और दूसरे में लगा दिया. ये मॉडल लंबे समय तक चल नहीं सकता था, तो ढह गया. अधूरे प्रोजेक्ट्स का अंबार लग गया.

Modi And Nirmala
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर के दिन इस घोषणा का ज़िक्र हिमाचल के धर्मशाला में हुए इन्वेस्टर सम्मिट में भी किया.

हाल के दिनों में GST और नोटबंदी से दिक्कतें बढ़ीं. कंपनियां बैंकों से पैसे नहीं उठा पा रही थीं तो नॉन बैंकिंग फाइनैंशियल कंपनी (NBFC) की तरफ मुड़ीं. लेकिन पिछले साल एक के बाद एक NBFC भी डूबने लगीं. तो अब हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रही कंपनियों के पास हाथ पसारने के लिए कोई जगह बची नहीं है. कई प्रोजेक्ट्स पूरा होने के ऐन पहले अटक गए हैं. भारत में ऐसे 16 सौ हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं जिनमें साढ़े चार लाख घर बनने हैं. इन्हें बस एक और धक्का चाहिए. यही धक्का है लास्ट माइल फंडिंग. जो अब सरकार की तरफ से आने वाली है.

इस लास्ट माइल फंडिंग के लिए पैसा कहां से आएगा?

सरकार जो 25 हज़ार करोड़ की मदद देने वाली है, उसमें से 10 हज़ार करोड़ वो अपने पास से देगी. बाकी 15 हज़ार करोड़ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और LIC जुटाएंगे. ये पैसा जाएगा Category-II Alternate Investment Fund में जिसे सेबी (SEBI) के यहां पंजीकृत करवाया जाएगा. इस पैसे का हिसाब रखने के लिए पेशेवर फंड मैनेजर नियुक्त किए जाएंगे.

बैंकिंग सेक्टर के बाद अब हाउसिंग सेक्टर के लिए राहत की ख़बर लाया है वित्त मंत्रालय.
बैंकिंग सेक्टर के बाद अब हाउसिंग सेक्टर के लिए राहत की ख़बर लाया है वित्त मंत्रालय.

किन प्रोजेक्ट्स को दिया जाएगा पैसा?

इसका फायदा सीमित या मध्यम आवक वाले खर खरीददारों को मिलेगा. लक्ज़री अपार्टमेंट्स को ये मदद नहीं मिलेगी. पैसा सिर्फ उन्हीं हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दिया जाएगा जो रीयल एस्टेट रेग्यूलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (RERA) के तहत पंजीकृत हैं. दूसरी शर्त है प्रोजेक्ट का ”नेट वर्थ पॉज़ीटिव” होना. माने प्रोजेक्ट की कुल कीमत उसकी देनदारियों से ज़्यादा होनी चाहिए. सादी भाषा में इसका मतलब हुआ कि प्रोजेक्ट इतने घाटे में नहीं होना चाहिए कि उसे बेचकर भी वो पैसा न चुकाया जा सके. जिन प्रोजेक्ट्स को नॉन परफॉर्मिंग असेट (NPA) मान लिया गया है, या जिनका नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में केस चल रहा है, वो भी इस फंड का लाभ ले सकेंगे. ऐसे प्रोजेक्ट्स को आमतौर पर वित्तीय मदद या लोन नहीं मिलता है. लेकिन सरकार ने अपने फैसले में इन्हें भी शामिल किया है.

Hardeep Puri Housing Minister
हरदीप सिंह पुरी, मंत्री, हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर मिनिस्ट्री.

क्या हाउसिंग सेक्टर इस फंड को डकार जाएगा?

हाउसिंग सेक्टर में निवेशक पैसा इसीलिए नहीं लगा रहे हैं कि वहां रिटर्न्स नहीं हैं. पैसा फंस जा रहा है. तो एक जिज्ञासा ये हो सकती है कि क्या सरकार का पैसा भी फंस जाएगा. क्योंकि सरकार का पैसा भी तो लोगों का ही पैसा है. तो जवाब ये रहा. फंड के लिए ज़रूरतमंद प्रोजेक्ट की पहचान करने के बाद पैसा एक एस्क्रो अकाउंट में डाला जाएगा. एस्क्रो अकाउंट उस खाते को कहते हैं जो एक थर्ड पार्टी की निगरानी में रहता है. लेनदेन पहले से तय शर्तों के आधार पर ही हो पाता है. रीयल एस्टेट के क्षेत्र में एस्क्रो अकाउंट्स का इस्तेमाल ये सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि पैसा उसी प्रोजेक्ट में लगे जिसके लिए लोगों से पैसा लिया गया है.

प्रोजेक्ट से होने वाली आवक को भी इसी एस्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा और इसी से फंड का पैसा लौटाया जाएगा. माने ये एक तरह का कर्ज ही है, जिसे हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रही कंपनियों को लौटाना होगा. सरकार का मानना है कि फंड में और निवेशक जैसे कि पेंशन फंड्स जुड़ सकते हैं और ये 25 हज़ार करोड़ से भी बड़ा हो सकता है. सब ठीक चला तो घरों के बनने के बाद पूरे पैसे वापस आ जाएंगे. सरकार तो ये भी कह रही है कि फंड में पैसा लगाने वालों को वित्तीय फायदा भी होगा.

Housing Projects
हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और मालिकों के लिए ये राहत भरा फैसला है.

इस फंड को लेकर दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार पिछले 2 महीने से तैयारियों में लगी थी. कई बैंकों और RBI के साथ बैठक हुई है. इसका फायदा घर खरीददारों के साथ-साथ सीमेंट और स्टील सेक्टर को भी मिलेगा, नौकरियां भी बढ़ेंगी. अगर वित्त मंत्री की बात सही निकलती है तो ये एक विन विन सिचुएशन साबित हो सकती है.


Source:


SHARE WITH LOVE
  • 102
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    102
    Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.