DRDO: मिशन शक्ति अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी क़ामयाबी

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इस परीक्षण के ज़रिए भारत ने पूरी दुनिया को अहम संदेश दिया है. प्रधानमंत्री द्वारा मिशन शक्ति की जानकारी देने पर विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए थे. विपक्ष का आरोप था कि मोदी सैनिकों और वैज्ञानिकों की क़ामयाबी को लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के पक्ष में इस्तेमाल करना चाहते है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मिशन शक्ति’ पर ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ के कई दिनों बाद आज DRDO ने इस क़ामयाबी को बताने के लिए प्रेस कांफ्रेंस की. डिफ़ेंस रिसर्च एंड डिवेलप्मेंट ऑर्गेनाइज़ेशन यानी DRDO के प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने मिशन शक्ति की तारीफ़ करते हुए कहा, “सैन्य क्षेत्र में अंतरिक्ष भी अब एक अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में जब भारत जैसे देश का इस तरह का अभ्यास करना और सफल होना पूरी दुनिया को संकेत देता है.”

उन्होंने कहा कि इस परीक्षण के ज़रिए भारत ने पूरी दुनिया को अहम संदेश दिया है. प्रधानमंत्री द्वारा मिशन शक्ति की जानकारी देने पर विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए थे. विपक्ष का आरोप था कि मोदी सैनिकों और वैज्ञानिकों की क़ामयाबी को लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के पक्ष में इस्तेमाल करना चाहते है.

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबम ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए ये तक कह दिया था कि “एक मूर्ख सरकार ही रक्षा रहस्य का ख़ुलासा करती है.”

इसके जवाब में डीआरडीओ प्रमुख ने कहा “आज दुनिया के सारे देश अंतरिक्ष में नज़र बनाए हुए हैं. ऐसे में यह रहस्य रह ही नहीं सकता. हमने सारी अनुमति लेकर ही यह क़दम उठया था.”

इससे पहले नासा ने भारत की एंटी-सैटेलाइट मिशन की कड़ी आलोचना की थी. नासा ने दावा किया था कि एंटी-सैटेलाइट मिशन के कारण अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को ख़तरा पहुंचा है. नासा ने सैटेलाइट के क़रीब 400 टुकड़ों की ऑर्बिट में मौजूदगी को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए ख़तरनाक बताया था..

नासा के अधिकारी जिम ब्रिंदेंस्टीन ने बताया था कि क़रीब 60 टुकड़े नासा ने ढूंढ निकाले हैं. 60 में से 24 टुकड़े आईएसएस की तय सीमा से उपर हैं.

नासा टाउनहॉल में नासा कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए जिम ने कहा था “भारत के एएसएटी टेस्ट के कारण ऑर्बिट में 400 टुकड़ों से भर गया है. ऐसी घटनाएं मानव स्पेस फ़्लाइट और भविष्य के गतिविधियों के अनुरूप नहीं है.”

ब्रिंदेंस्टीन ट्रम्प सरकार के पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने भारत के एएसएटी मिशन की खुली आलोचना की थी.

नासा के मुताबिक़ भारत का यह क़दम दूसरे देशों को भी बढ़ावा दे सकता है. अगर ऐसा बाक़ी देश भी करेंगे तो ये ख़तरे की घंटी है.

नासा के मुताबिक़ ऐसी गतिविधियां ऐस्ट्रनॉट के लिए बड़ा ख़तरा हैं. इससे सबकी ज़िंदगी ख़तरे में आ सकती है. सतीश रेड्डी ने इसके इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा “अंतरिक्ष में जो भी मलबा है वो 45 दिनों में सड़ कर ख़त्म हो जाएगा”.

 अमरीका, चीना और रूस के बाद भारत चौथा ऐसा देश है जिसने एएसएटी मिशन को अंजाम दिया है.


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