क्या सिरदर्द बन चुके हैं PUBG जैसे गेम्स ?

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भारत में लाखों बच्चों को पीयूबीजी जैसे ऑनलाइन गेम्स की लत लग चुकी है. माता-पिता इन्हें अब डि-एडिक्शन सेंटरों और मनोचिकित्सकों के पास लेकर आ रहे हैं.

इस वक्त ऑनलाइन गेमिंग का शौक़ चरम पर है. मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी के बीच PUBG यानि प्लेयर्स अननोन बैटल ग्राउंड जैसे खेल ख़ासे लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन मनोचिकित्सकों के मुताबिक़ ये लोकप्रियता अब बीमारी बन चुकी है. हालात इतने ख़राब हैं कि रोज़ाना सैकड़ों लोग ऑनलाइन गेमिंग से निजात पाने के लिए डि-एडिक्शन सेंटरों और मनोचिकित्सकों का रुख़ कर रहे हैं.

ऑनलाइन गेंमिंग दुनिया में ब्लू व्हेल और PUBG जैसे खेल अभिभावकों का सिरदर्द बन चुके हैं. PUBG यानि प्लेयर अननोन बैटलग्राउंड एक ऐसा खेल है जिसमें प्लेयर अनजान लड़ाई के मैदान में और एक अनजाने वॉर ज़ोन में, अनजाने दुश्मनों को मारने की कोशिश करता है. इस खेल में ज़बर्दस्त एक्शन, शानदार ग्राफिक्स खेलने वाले को वॉरियर होने का अहसास दिलाता है.

इसमें 100 खिलाड़ी वर्चुअली किसी टापू पर उतरते हैं. इसके बाद अत्याधुनिक हथियारों के ज़रिए खुद का बचाव करते हुए दुश्मनों को मार गिराते हैं.

गेम के दौरान खिलाड़ी का सुरक्षित क्षेत्र धीरे-धीरे छोटा होता जाता है. खिलाड़ी पर उसी क्षेत्र में रहने पर दबाव बढ़ता है और अंत में जीवित बचता है वही विजेता बन जाता है. सितंबर 2015 में इसमें ताज़ा अपडेट के ज़रिए नाइट मोड, नया स्पेक्टेटर मोड, कई हैलोवीन थीम और मूवी की तरह के तमाम नए इफेक्ट जोड़े गए हैं.
हालांकि ये खेल रोमांच से भरा है लेकिन यही रोमांच लोगों में इसके एडिक्शन की वजह बन रहा है. 

क्वार्ट्ज़ ग्लोबल एक्जिक्यूटिव स्टडी के मुताबिक़ पीयूबीजी भारत का नंबर एक ऑनलाइन गेम है. देश भर में 5 करोड़ से ज़्यादा युवा और बच्चे इसे खेल रहे हैं या खेल चुके हैं. गूगल ने पीयूबीजी को 2018 का बेस्ट गेम माना है.

दुनियाभर में इस खेल के 40 करोड़ से ज़्यादा यूज़र हैं. मनोचिकित्कों का कहना है कि ये खेल बच्चों और युवाओं को हिंसक बना रहा है. यो गेम बच्चों के बीच गोलियां चलाना,एक-दूसरे की हत्या करना, लूटपाट, आक्रामकता आदि को बढ़ावा दे रहा है.

ये खेल भारत में मार्च 2017 में माइक्रोसॉफ्ट विंडो के ज़रिए आया। दिसंबर 2017 में ये गेम इंटरनेट पर सबके लिए उपलब्ध हुआ। अब ये सभी तरह के मोबाइल फोन, इंटरनेट,विंडो और कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम पर उपलब्ध है. इसके अलावा प्ले स्टेशन 4 पर ये खेल मौजूद है।

इस गेम की बढ़ती लत की वजह से गुजरात, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर में इस पर रोक लगा दी गई है. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया के मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में हर हफ्ते ऐसे तीन से चार बच्चे काउंसलिंग के लिए आ रहे हैं जिन्हें इस खेल की लत लग गई है. भारत में तमाम यूज़र्स हर रोज़ औसतन 1 घंटा मोबाइल पर गेम खेलने में बिताते हैं. लेकिन PUBG यूज़र्स औसतन हर रोज़ पांच से छह घंटे तक गेमिंग पर ख़र्च कर रहे हैं.


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