विश्व आदिवासी दिन परिभासा इंडीजिनस आमीॅ ओफ इंडिया – राज वसावा

SHARE WITH LOVE
  • 105
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    105
    Shares

दोस्तो
??वैसे तो कई सारे साथीओ ने विश्व आदिवासी दिन की पोस्ट बनाकर रखी है। फिर भी मैं अपनी बात रखना चाहता हूं।
??ईस साल का 24 वां वर्ल्ड इंडीजिनस डे 9 अगष्ट हमने महाराष्ट्र के नंदुरबार /सतपुड़ा जिले के धडगांव तहसील में बडी धूमधाम से मनाया।
??विश्व आदिवासी दिन वैसे तो 90 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। और भारत मे हर साल के चलते ईस साल हर छोटे-बड़े गांव, शहर, राज्य मे बडी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर मनाया। ??आदिवासी समाज अब जाग रहा है। संगठित हो रहा है। अपनी संस्कृति और सभ्यता को बचाने के लिए आगे आ रहा है।
??लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि आज भी लोग विश्व आदिवासी दिन को सिर्फ नाचने – गाने का त्योहार मानते हैं जब की ये दिन का सही अर्थ कुछ और ही है। युनाइटेड नेशन ओग्रनाईझेशन UNO ने आदिवासी समुदाय आज किस परिस्थितियों मे है। उनकी संस्कृति और सभ्यता को कैसे बचाया जा सकता है। आदिवासी कैसे इस दुनिया और प्रकृति के लिए महत्वपूर्ण है। आदिवासी समाज की क्या जरूरते है उसे कैसे पुरा किया जाए। ईन मुद्दों पर चर्चा की जाए। मंथन किया जाना चाहिए।
??भारत में आदिवासी समाज को आज भी अलग अलग योजनाओं के तहत विस्थापित किया जा रहा है। आदिवासियों को आज भी झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आसाम, गुजरात में नक्सली और माओवादी बता कर उनका नर संहार कर रहे हैं। आदिवासी लड़कियों को कोडियो के दाम में बेचा जा रहा है। उनका बलात्कार करके मार दिया जाता है। आदिवासी युवाओं को नकली शराब की लत लगाकर मारा जा रहा है। आदिवासियों की जमीन पूंजीपतियों के जरिए छीनी जा रही है। जंगलो को खत्म किया जा रहा है। सभी तरह के खनिज अवैध रूप से लुटे जा रहे हैं।
??भारत की राज्य सरकारे और केंद्र सरकार आदिवासी समाज के लिए संविधान मे दिए गए मौलिक और संवैधानिक अधिकार की धज्जियां उडा रही है। हमें इन बातो पर गौर करना चाहिए।
??हमारा समाज बहोत महान है हमारी संस्कृति और सभ्यता भी बहोत महान है। हमें हमारी दुनिया में हमारे तरीके से जिने दो यही हमारी मांग है।
??ईस पावन अवसर पर हमारे नये संघटन “इंडीजिनस आमिॅ ओफ – IAI के लोगो का भी अनावरण इस सभा में किया गया। हमारा मकसद हमें जल, जंगल, जमीन, खनिज का अधिकार मिलना चाहिए। अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। अच्छी अस्पताल, रोजगार मिलना चाहिए। विस्थापन बंध किया जाना चाहिए। अनुसुचि 5-6 की अमलवारी पुरी तरह होनी चाहिए। कुपोषण, भुखमरी सिकलसेल जैसी बीमारी को खत्म किया जाना चाहिए।
??ईस प्रोग्राम मे शोभा बढाने के लिए दिल्ली जेएनयू(जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी) से मुलायम सिंह यादव, मनीष मीना, अतुल मीना और गांधीनगर सीयुजी(सेन्ट्रल युनिवर्सिटी ओफ गुजरात) से सियाराम मीना जैसे दिग्गज आगेवान, सामाजिक न्याय की लड़ाई के योद्धाओं ने अपने किमती वक्त का योगदान दिया।
??गुजरात से हमेशा लोगों के दिलों दिमाग पर छा जानेवाली वीरांगना यमुना वलवी ताई और मेरे हर संधषॅ के साथी डॉ प्रफुल वसावा ने भी धडगांव के लोगों का दिल जीत लिया। हमारे दुसरे साथी दिलीप कुमार यादव, निझाम शेख, आलोक कुमार, सुनिता लकरा जो ईस प्रोग्राम में शामिल न हो सके जिनको हमने बहोत मीस किया। साथ ही गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड से आये हुए सभी सदस्यों का दिल से आभार व्यक्त करता हुं।
??इस कायॅक्रम के आयोजक आदिवासी टाईगर सेना, धडगांव आदिवासी एकता परिषद, एकलव्य संधटन, वकिल संधटन, डॉक्टर संधटन, शिक्षक संधटन, युवा विद्यार्थी मंच संधटन, और सभी समाज हितेच्छु साथियों का धन्यवाद करता हुं। संयोजको मे माय टीवी चैनल, ध क्रिटिकल मीरर न्युझ चैनल, मराठी 7 न्युझ चैनल, मिशन आदम संगठन, भील सेना, भीलप्रदेश ट्राइबल सेना, मुख्य भूमिका में थे।
??और खास तौर पर आदिवासी टाईगर सेना के अध्यक्ष रविंद्र पाडवी, प्रवक्ता और विद्यार्थि संध अध्यक्ष अजय गावित, सरचिटनीस अमोल वलवी, धडगांव तहसील अध्यक्ष जोगिंदर वलवी, अक्कलकुवा तहसील अध्यक्ष एडवोकेट रुपसिंग वसावे,हारसिंग पावरा, एडवोकेट अभिजीत वसावे, राजु पावरा और दुसरे तहसील, जिल्ला, प्रदेश के सभी होद्देदार और सदस्यों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हुं। आप लोगों की रात – दिन की महेनत रंग लाई और हजारो लोगों को ईस प्रोग्राम मे इकठ्ठा कर दिया। और ईस प्रोग्राम को सफल बनाया।
??जय आदिवासी जय IAI जय भारत

???
राज वसावा
संस्थापक – इंडीजिनस आमीॅ ओफ इंडिया
नेशनल ब्यूरो चिफ – माय टीवी चैनल


SHARE WITH LOVE
  • 105
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    105
    Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.