चीन समेत 15 देशों ने सबसे बड़े व्यापार समझौते पर किए दस्तखत, दायरे में विश्व की 1/3 आर्थिक गतिविधियां 

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वियतनाम के प्रधान मंत्री ने चौथे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की.

हनोई:

आसियान के सदस्य देशों(ASIAN Nations) और चीन समेत कुल 15 देशों ने रविवार (15 नवंबर) को विश्व के सबसे बड़े व्यापार समझौते क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) का गठन करने पर वर्चुअल तौर पर दस्तखत किए हैं. इसके दायरे में दुनियाभर की करीब एक तिहाई आर्थिक गतिविधियां आएंगी. इस समझौते को चीन के लिए एक बड़ा गेमचेंजर के तौर पर देखा जा रहा है. कई  एशियाई देशों को उम्मीद है कि इस समझौते के बाद से कोरोना वायरस महामारी की आर्थिक मार से तेजी से उबरने  में मदद मिलेगी.

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विशेषज्ञों के मुताबिक, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP)- जिसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ 10 दक्षिण पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं – जीडीपी के संदर्भ में दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है. वियतनाम के प्रधान मंत्री ने चौथे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की.

पहली बार 2012 में प्रस्तावित, इस सौदे पर आखिरकार दक्षिण-पूर्व एशियाई शिखर सम्मेलन (आसियान सम्मेलन) के अंत में मुहर लगा दी गई थी क्योंकि सदस्य देशों के नेता महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए इसे कारगर मान रहे हैं. समझौते के तहत सदस्य देश टैरिफ कम करेंगे और व्यापार सेवा के रास्ते खोलेंगे. इस समझौते में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है. लिहाजा, इसे चीन के नेतृत्व में एक वैकल्पिक व्यापार समझौता समझा जा रहा है जो वाशिंगटन व्यापार पहल को कमतर कर सकेगा.

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वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने समझौते पर वर्चुअली हस्ताक्षर करने से पहले कहा, “मुझे खुशी है कि आठ साल की जटिल चर्चा के बाद, आज हम आधिकारिक तौर पर आरसीईपी वार्ता को समाप्त कर समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.” वियतनामी पीएम ने कहा कि यह समझौता संकेत देता है कि कोरोना वायरस महामारी संकट के इस मुश्किल समय में RCEP देशों ने संरक्षणवादी कदम उठाने के बजाए अपने बाजारों को खोलने का फैसला किया है. इस समझौते में आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं.

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समझौते में भारत के लिए विकल्प खुले रखे गए हैं.अपना बाजार को खोलने की अनिवार्यता की वजह से भारत इस समझौते से बाहर निकल गया था. इस बीच जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि उनकी सरकार इस समझौते में भविष्य में भारत की वापसी की संभावना समेत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष आर्थिक क्षेत्र के विस्तार को समर्थन देती है. 



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