मोदी और बिडेन द्वारा निर्धारित भारत-अमेरिका एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए हाई लेवल ऑफिसर करेंगे समर्थन

SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  


अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान को काबिज हुए करीब दो महीने का समय होने जा रहा है. इसके बाद से अब तक वहां के दशा सामान्य नहीं हो सके हैं. कई राष्ट्रों को अफगानिस्तान में उपस्थित अपने नागरिकों की चिंता सता रही है.

रोज क्रूर हत्याएं और बम विस्फोट की घटनाओं से सभी दहशत में हैं. इस बीच, अमरीका और ब्रिटेन ने सोमवार को अपने नागरिकों को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के होटलों से दूर रहने की चेतावनी दी. इसमें खास तौर से वहां के प्रसिद्ध सेरेना होटल को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को बोला गया है.

अमरीका के विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए कहा, अमेरिकी नागरिक, जो सेरेना होटल में या उसके आसपास हैं, उन्हें तुरंत उस स्थान को छोड़ देना चाहिए. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने अफगानिस्तान की यात्रा नहीं करने अपनी सलाह के अपडेट में कहा, बढ़ते हुए जोखिम को देखते हुए आपको नागरिकों को होटलों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

सेरेना होटल काबुल का सबसे प्रसिद्ध लक्जरी होटल है, जो आठ हफ्ते पहले तालिबान के काबुल में कब्जे से पूर्व विदेशियों की पहली पसंद हुआ करता था. यह दो बार चरमपंथी हमलों का निशाना रहा है.

माना जा रहा है कि तालिबानी नेता बरादार अब काबुल पैलेस में रह रहा है, जबकि उसके समर्थक और मुल्ला उमर का बेटा रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब अभी भी कंधार में है. सिराजुद्दीन हक्कानी अभी भी काबुल में रहता है. तालिबान के सह-संस्थापक, मुल्ला बरादर के आने से सरकार के भीतर तनाव बढ़ेगा क्योंकि याकूब गुट आईएसआई समर्थित हक्कानी गुट का मजबूत प्रतिद्वंद्वी है. यही स्थिति तालिबान के अफगान विरोध के साथ भी है, जिसमें प्रत्येक नेता अपना वर्चस्व चाहता है और किसी के साथ कार्य करने को तैयार नहीं है.

:-

बता दें कि सितंबर महीने के मध्य में अफगान नेशनल टीवी के साथ एक इंटरव्यू में मुल्ला बरादर ने इन खबरों को अफ़वाह बताकर इसका खंडन किया था कि वह पिछले सप्ताह काबुल में राष्ट्रपति भवन में एक टकराव में घायल हो गया था या मारा गया था. मीडिया में आई इन खबरों को लेकर पूछे जाने पर बरादर ने बोला था, ‘नहीं, यह बिल्कुल भी हकीकत नहीं है. अल्लाह का शुक्र है कि मैं फिट और स्वस्थ हूं. और मीडिया के दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि हमारे बीचे आतंरिक असहमति है या फिर आंतरिक रार है.

दरअसल, तालिबान और हक्कानी के बीच वर्चस्व को लेकर काबुल पर कब्जे के बाद से लड़ाई जारी है. तालिबान की सियासी ईकाई की ओर से सरकार में हक्कानी नेटवर्क को प्रमुखता दिए जाने का विरोध किया जा रहा है. वहीं हक्कानी नेटवर्क स्वयं को तालिबान की सबसे फाइटर यूनिट मानता है. बरादर के धड़े का मानना है कि उनकी कूटनीति के कारण तालिबान को अफगानिस्तान में सत्ता मिली है, जबकि हक्कानी नेटवर्क के लोगों को लगता है कि अफगानिस्तान में जीत लड़ाई के दम पर मिली है.



Source link


SHARE WITH LOVE
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •