रेडियो टीवी अफगानिस्‍तान में तालिबान ने नहीं दी महिलाओं को काम करने की इजाजत

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काबुल पर कब्‍जे के साथ ही तालिबान सरकार के गठन का प्रयास कर रहा है। दो दशक बाद तालिबान ने एक बार फिर वही जगह पा ली है। लेकिन, इन दो दशकों में काफी कुछ बदल चुका है। आपको बता दें कि 1996-2001 के बीच अफगानिस्‍तान पर तालिबान का शासन था। उस वक्‍त देश में न कोई शापिंग माल था और न ही कोई ऐसी इमारत थी जिसको देखकर हैरानी होती हो। लेकिन अब चीजें बदल चुकी हैं। गरीब मुल्‍कों में शामिल अफगानिस्‍तान की संसद का निर्माण तक भारत ने करवाया था। बदहाली के शिकार अफगानिस्‍तान में तालिबानी शासन का मंजर याद कर आज भी लोगों के शरीर में सिहरन दौड़ जाती है।

हैरान है तालिबान

दो दशक के बाद अब जबकि तालिबान काबुल पर कब्‍जा कर चुका है तो वहां हुए बदलाव को देख कर हैरान है। बड़ी-बड़ी इमारतें और इनमें मौजूद कीमती फर्नीचर उनकी सोच से भी बाहर की बातें हैं। अब ये सब कुछ इनके लिए कौतुहल का विषय बन चुका है। काबुल समेत कई जगहों की युवा पीढ़ी तालिबान से सीधेतौर पर वाकिफ भी नहीं रही हैं। उन्‍होंने केवल अपने बड़ों से इस बारे में सुना है। इस युवा पीढ़ी ने इन दो दशकों में हमले होते हुए तो खूब देखे और सुने भी, लेकिन इसके बावजूद उनको मिली आजादी में कोई कमी नहीं आई।

साइकिल से होता था सफर 

1992 में रूस के यहां से जाने और विघटन के बाद अफगानिस्‍तान में बड़े पैमाने पर सिविल वार की स्थिति पैदा हो गई थी। इसका फायदा उठाते हुए तालिबान ने 1996 में यहां पर कब्‍जा कर लिया था। तालिबान के दौर में गाडि़यां भी इस तरह से नहीं थीं, जैसी आज हैं। उस वक्‍त अधिकतर अफगानी साइकिल से तो घोड़ा गाड़ी से ही सफर करते थे। वहां पर पीले रंग की टैक्‍सी न के ही बराबर थीं।

देश में था केवल एक कंप्‍यूटर

आपको जानकर हैरानी होगी कि उस वक्‍त देश में केवल एक ही कंप्‍यूटर हुआ करता था और वो भी तालिबान शासन के प्रमुख मुल्‍ला उमर से संबंधित था। उसको इसे खोलना या बंद करना भी नहीं आता था। आज तालिबानी हर जगह इसका इस्‍तेमाल होते हुए देख रहे हैं। हालांकि, आज भी इन तालिबानियों में हजारों ऐसे हैं जिन्‍हें न तो इसे खोलना ही आता है और न ही बंद करना आता है।

दो दशक पहले तक नहीं थे मोबाइल फोन 

उस वक्‍त देश में मोबाइल फोन भी नहीं थे। आज तालिबानी आतंकी खुद काबुल की सड़कों पर स्‍मार्ट फोन का इस्‍तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई जगहों पर वो महंगी कारों के साथ या खूबसूरत इमारतों के बाहर अपनी सेल्‍फी भी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। तालिबान ने कभी नहीं सोचा होगा कि जब वो दोबारा काबुल पहुंचेंगे तो उन्‍हें ऐसा देखने को मिलेगा। आज अफगानिस्‍तान में चार मोबाइल कंपनियां हैं।

घरों से अकेले बाहर नहीं निकलती थीं महिलाएं

तालिबान जिस वक्‍त यहां से भागा था उस वक्‍त महिलाएं घरों से अकेले बाहर नहीं निकलती थीं और यदि वो किसी मर्द के साथ निकलती भी थीं तो शरीर को पूरा ढकने वाला बुर्का पहने हुए निकलती थीं। लेकिन अब काबुल की सड़कों पर उन्‍हें अकेले शापिंग माल में जाती हुई महिलाएं और अपने काम पर जाती हुई या कार चलाती हुई महिलाएं भी दिखाई दे रही हैं।

इंडोर जिम और शापिंग माल

आज तालिबान को काबुल में इंडोर जिम की भरमार है। एक से एक बड़ी दुकानें हैं। एम्‍यूजमेंट पार्क हैं, जिनमें तालिबान को उछलते कूदते सभी ने देखा है। दो दशक पहले तक देश में सार्वजनिकतौर पर दोषियों के हाथ या सिर काट देना या उन्‍हें खुलेआम सड़कों पर फांसी पर लटका देना बेहद आम बात थी। काबुल में घुसे तालिबानी फिलहाल हर घर पर जाकर वहां मौजूद हथियारों को जब्‍त कर रहे हैं। सभी सरकारी जवानों से भी उनके हथियार ले लिए गए हैं। जगह-जगह पर तालिबान ने अपने आतंकियों को लगा दिया है। इतना ही नहीं टीवी चैनल के अंदर और बाहर भी उनके ही आदमी हैं।



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