3,000 वर्ष पुरानी भारतीय कविता का अरबी में हुआ अनुवाद, शारजाह में विमोचन

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शारजाह
शारजाह इंटरनेशनल बुक फेयर (एसआईबीएफ) से इतर एक निजी कार्यक्रम में 3,000 वर्ष पुरानी भारतीय कविता वाली पुस्तक के अरबी संस्करण का विमोचन किया गया. ‘100 महान भारतीय कविताएं’ कश्मीरी, बंगाली, तमिल और उर्दू सहित 28 भाषाओं में 28 कविताओं का संकलन है जिसमें मिर्जा गालिब और फिराक गोरखपुरी जैसे महान भारतीय कवियों के कार्यों को बढ़ावा दिया गया है.

मेडागास्कर में भारतीय राजदूत अभय कुमार ने कहा, ‘पुस्तक में कुछ कविताएं 3,000 वर्ष पुरानी हैं, जो 2018 में पहली बार प्रकाशित हुई और फिर कई भाषाओं (पुर्तगाली, इटालिन, स्पेनिश, मालागासी, फ्रेंच, आयरिश और नेपाली) में अनुवादित पुस्तक का संपादन किया.’ प्रोग्राम के दौरान एक वीडियो संदेश में कुमार ने कहा, ‘यह भारतीय कविता को अरब दुनिया में लाखों पाठकों तक ले जाने में सहायता करेगा और यह न केवल मेरे लिए बल्कि सभी भारतीय कवियों के लिए भी गर्व का एक महान पल है.

शारजाह अमीरात में एक्सपो सेंटर के बौद्धिक हॉल में भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा बुधवार को आयोजित किया गया जो 11 दिवसीय उत्सव है. शारजाह इंस्टीट्यूट फॉर हेरिटेज में सामग्री और प्रकाशन के निदेशक मिन्नी बौनामा ने दुबई में हिंदुस्तान के महावाणिज्य दूतावास के साथ अपनी पहले योगदान में पुस्तक का अनुवाद किया. उन्होंने कहा, ‘हमने इस पुस्तक का अनुवाद भारतीय काव्य विरासत (अरब दुनिया के लिए) और संयुक्त अरब अमीरात और हिंदुस्तान के बीच योगदान और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने के लिए किया है.

उन्होंने आगे और अनुवादों का इशारा देते हुए कहा, ‘यह केवल एक परियोजना की आरंभ है जिसका उद्देश्य दोनों राष्ट्रों की विरासत को व्यापक पैमाने पर प्रचारित करके दोनों पक्षों के बीच सांस्कृतिक पुल को मजबूत करना है.



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